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' मुलायम के लोग ' चले गए !
दिनेश शाक्य 
इटावा .  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गृह जिले इटावा में चुनाव पूर्व मुलायम के लोग नामक कार्यालय खोलकर के खासी सुर्खियां बटोरी गई थी लेकिन अब यह कार्यालय ना केवल बंद हो गया है बल्कि मुलायम के लोग की तख्ती को भी उखाड़ दिया गया है । इटावा मे तीसरे चरण मे 19 फरवरी को चुनाव हो चुका है लेकिन उससे पहले ही मुलायम के लोग कार्यालय मे तालाबंदी ने हर किसी को सन्न कर दिया है क्यो कि इस संगठन के पदाधिकारियो का दावा था कि यह कार्यालय मुलायम समर्थको का सम्मान करने के लिए खोला गया है । खुद मुख्यमंत्री भी इस कार्यालय के औचित्य पर 16 फरवरी को इटावा मे हुई अपनी चुनावी रैली मे सवाल उठा चुके है ।
मुलायम के लोग कार्यालय के प्रवक्ता जिला पंचायत सदस्य दिलीप यादव कार्यालय बंदी पर सफाई देते हुए कहते है कि असल मे यह कार्यालय जिस भवन मे था वहॉ पर फिलहाल अस्थाई व्यवस्था की गई थी अब नये कार्यालय को राज्यस्तरीय स्वरूप मे अपने निजी भवन मे स्थापित किया जायेगा इसलिए कार्यालय बंद किये जाने की बाते बेमानी है ।
ऐसा कहा जा रहा है की जितनी चर्चा मुलायम के लोग कार्यालय खोलने के बाद इटावा में नहीं हुई उससे कहीं ज्यादा चर्चा अब इस कार्यालय के बंद होने के बाद शुरू हो चुकी है क्योंकि इस कार्यालय में कहने के लिए तो मुलायम के लोग बैठ रहे थे लेकिन हकीकत में वह सभी के सभी शिवपाल सिंह यादव के लोग थे जिनके बारे में एक जनचर्चा यह भी कही और सुनी जा रही है कि वह सभी के सभी समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराने की दिशा में काम करने में जुटे हुए थे और उनका मंशा और उद्देश्य चुनाव पूरा होते ही पूरा हो गया है ।
इसी वजह से अब कार्यालय को बंद कर दिया गया । मुलायम के लोग कार्यालय में जो पदाधिकारी सक्रिय दिखाई दे रहे थे । वह भी है पूरी तरीके से अपने घरों में कैद हो गए हैं । वह कहीं पर नजर नहीं आ रहे हैं । इतना जरूर देखा और सुना जा रहा है कि जब कभी भी शिवपाल सिंह यादव इटावा पहुंचते हैं तब वह लोग उनको चेहरा दिखाने के लिए जरूर पहुंच जाते हैं ।
मुलायम के लोग कार्यालय को संचालित कर रहे समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सुनील यादव, पूर्व महासचिव कृष्ण मुरारी गुप्ता,पूर्व महासचिव अजय भदौरिया , मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के पूर्व जिला अध्यक्ष फरहान शकील , बाबा ग्रुप के प्रबंधक संजय शुक्ला ,जिला पंचायत सदस्य दिलीप यादव आदि से बारी बारी सिलसिलेवार ढंग से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की गई लेकिन कोई भी फिलहाल अपनी बात कहने के लिए सामने आने के लिए तैयार नहीं हुआ । इसी से ऐसा लगता है कि यह सभी के लोग सिर्फ मुलायम के लोग के सम्मान के बहाने केवल दिखावा करने में जुटे हुए थे ।
इस सब के विपरीत समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल यादव का दावा है कि मुलायम के लोग नाम का कार्यालय खोल करके कुछेक लोगों ने समाजवादी पार्टी में फूट डालने का काम किया था । उन्होंने जो उम्मीद करके रखी हुई थी । वह उम्मीद उनकी पूरी होती हुई नहीं दिखी मुलायम के लोग की टीम चुनाव करीब आते आते समाजवादी पार्टी के लिए काम करने में जुट गई और इसी वजह से उन्हें मजबूरन अपने इस कार्यालय को बंद करना पड़ा । असलियत में इनका मंशा और उद्देश समाजवादी पार्टी को कमजोर करने का था लेकिन जब उनको मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की असलियत का एहसास हुआ तो उन्होंने मुलायम के लोग के साथ में काम करना बंद कर दिया क्योंकि मुलायम के लोग अधिकाधिक समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों से वोट मांगने की अपील करते हुए नजर आ रहे थे और यह बात मुलायम के लोग संगठन में काम करने वाले लोगों को समझ नहीं आई इसी वजह से उन्होंने उनसे दूरी बना ली । 
मुलायम के लोग नामक संगठन के बाहर रहने वाले पूर्व चिकित्साअधिकारी वी.के.मिश्रा ने दावे के साथ बताया कि असल मे मुलायम के लोग कार्यालय मे 17 फरवरी के बाद कोई सक्रियता नही देखी गई है । 17 फरवरी के शाम से मुलायम के लोग का बोर्ड हट गया है और कोई भी गतिविधि इधर एक हफते से नही हो रही है। अब यहॉ पूरी तरह से शंाति हो चुकी है । लेकिन जिस समय कार्यालय खुला हुआ था उस समय भारी भीड दिखाई दिया करती रही थी जिससे आसपास के लोगो को खासी परेशानी हुआ करती थी । 
चुनाव पूर्व समाजवादी पार्टी में लंबे समय तक चले सियासी घमासान के बाद ‘मुलायम के लोग’ संगठन से जुड़े लोगों व शिवपाल समर्थकों ने सपा के प्रत्याशी की खिलाफत का ऐलान किया । सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बनने के साथ ही सपा जिलाध्यक्ष सुनील यादव, कृष्ण मुरारी गुप्ता, अजय भदौरिया, राकेश यादव, आशीष पटेल आदि ने सपा से इस्तीफा दे दिया था । इन लोगों ने ‘मुलायम के लोग’ नाम से अलग कार्यालय खोल लिया और शिवपाल का समर्थन करने की घोषणा की थी । तब इन लोगों ने यहां सपा प्रत्याशी के लिए वोट मांगने न मांगने की बात स्पष्ट नहीं की थी । 
छोटे लोहिया के नाम से लोकप्रिय समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता जनेश्वर मिश्र ने अपने घर की दीवार पर लोहिया के लोग शीर्षक लिखकर एक संदेश देने की कोशिश की थी उसी तर्ज पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गृहनगर इटावा में भी मुलायम के लोग लिखकर एक घर को कार्यालय की शक्ल दी गई थी लेकिन अब यह कार्यालय बंद कर दिया गया ।  इस कार्यालय मे डा.राममनोहर लोहिया,मुलायम सिंह यादव और जनेश्वर मिश्र की पुरानी तस्वीरे के माध्यम से लोगो को एकजुट करने की कोशिश की गई है ।
समाजवादी पार्टी का सिंबल जब अखिलेश यादव के पास पहुंच गया तो शिवपाल सिंह यादव के इन समर्थकों ने अपने आप को समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जाना मुनासिब नहीं समझा ।
शिवपाल सिंह यादव का समर्थन करने वाला यह गुट समाजवादी पार्टी के लिए कम बल्कि शिवपाल सिंह यादव के लिए अधिक काम करता हुआ दिख रहा ।
29 जनवरी को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव अपने चौगुर्जी स्थित आवास से करीब डेढ़ सौ मीटर दूर बने मुलायम के लोग कार्यालय पर अपने समर्थकों के साथ पैदल मार्च करते हुए पहुंच कर उत्साहवर्धन करने पहुंचे थे । शिवपाल सिंह यादव के इस कदम को मुलायम के लोग समर्थकों को खुश करने की कोशिश का हिस्सा माना गया रहा । लेकिन अब इस कार्यालय के बंद होने के कारण मुलायम के लोग संगठन के पदाधिकारी सन्नाटे मे है ।
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