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बागियों को शह देते मुलायम गैर भाजपावाद की नई पहल दम तोड़ रही है नैनी झील अखिलेश पर दबाव बढ़ा रहें है मुलायम
वह बेजान है और हम जानदार हैं

अरुण कुमार त्रिपाठी

लखनऊ .मुख्यधारा के मीडिया और बहुसंख्यक समाज के बीच नफरत की नजर से देखे जाने वाले आजम खान का जादू अल्पसंख्यकों के सिर चढ़ कर बोलता है। यह बात उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में जगह- जगह साबित हो रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि ना आजम खान अपने विरोधियों को सह पाते हैं और न ही उनके विरोधी उन्हें। यही वजह है कि उन्होंने `आज तक’ के पत्रकारों पर मुकदमा ही नहीं किया बल्कि उनके विरुद्ध संसदीय विशेषाधिकार का मामला बनाया, भैंस वाले मामले पर ब्लागर पर केस किया और दलित लेखक कंवल भारती को भी जेल भिजवाया, इसके बावजूद इस चुनाव में मोदी और अमित शाह की तेजाबी जुबान का अगर कोई जवाब देता है वह आजम खान ही हैं। भले ही शिवराज सिंह चौहान कहें कि उनका नाम जुबान पर लाने के बाद नहाना पड़ता है।
आंबेडकरनगर जिले की कटेहरी विधानसभा क्षेत्र के इत्तिफातगंज कस्बे में सभास्थल पर उनका हेलीकाप्टर उतरते ही न सिर्फ धूल का बवंडर का उठता है बल्कि लोगों के दिलों में जज्बात का एक तूफान खड़ा होने लगता है। यह बुनकरों का कस्बा है और आंबेडकर नगर की उपजाऊ धरती पर यहां के व्यापारी और किसान यह उम्मीद पाले हुए हैं कि अगर सपा सरकार अगली बार आई तो उनकी खुशहाली बढ़ेगी। इसी जज्बे को आजम खान फौरन पकड़ लेते हैं। पहले तो वे हेलीकाप्टर की ओर दौड़ रहे नौजवानों को अपनी तरफ बुलाते हुए कहते हैं,`` हेलीकाप्टर से अच्छा है मुझे देख लो। वह बेजान है और हम जानदार हैं।’’
यह अपील सुनते ही भीड़ वापस मंच की ओर खिंच आती है और वे उसे सुरक्षा घेरे में ही बैठने का आदेश दे देते हैं। उसके बाद वे इस चुनाव की अहमियत पर टिप्पणी करते हैं, ``चुनाव चंद दिनों का मेहमान है आया है, चला जाएगा। पर यह एक लब्ज आने वाले पांच सालों के लिए एक इबारत लिख जाएगा।’’फिर वे उसी तरह अपने उत्पीड़न को मुद्दा बनाते हैं जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के चुनाव में बनाते थे। ``आजम खान एक बदनाम आदमी है। जिसने भारत मां को डायन कहा। उसके बाद नारा लगा—जो आजम खान का सिर लाएगा, राम भक्त कहलाएगा। लेकिन मेरे दामन में पैबंद हैं पर धब्बा नहीं है।’’
इस निजी सफाई के साथ वे नोटबंदी और प्रधानमंत्री पर आ जाते हैं। हालांकि वे उनका नाम नहीं लेते लेकिन बादशाह कहकर जब वे संबोधित करते हैं तो इस देहाती कस्बे की पब्लिक को सब कुछ समझ में आ जाता है। वे कहते हैं कि कालाधन लाने का वादा किया था प्रधानमंत्री ने लेकिन बादशाह ने चोर को खबरदार कर दिया और चोर पैसा लेकर भाग गया। इसके साथ ही वे बसपा और भाजपा की नजदीकी को उजागर करना भी नहीं भूलते क्योंकि उन्हें मालूम है कि अगर अल्पसंख्यकों के वोट बसपा को गए तो सपा का जीतना मुश्किल है। तब शायद इस इलाके में `दादा’ के नाम से जाने जाने वाले धर्मनिरपेक्षता के योद्धा जयशंकर पांडे का चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा।
यहां पर आजम खान का डायलाग जनता के जज्बात को छूता है और वह बार-बार ताली बजाती है और आजम खान जिंदाबाद के नारे लगाती है।`` कौन थी वह जिसने गुजरात में आपके कातिलों के लिए वोट मांगा? आग नहीं लगा रहा हूं। आग लगाने वालों(मायावती) का पता बता रहा हूं। पिछले चुनाव में बीजेपी वालों ने मुसलमानों के मोहल्ले में जाकर पूछा कि याद है। लोगों ने कहा हां जनाब याद है गुजरात का वह मंजर। लोगों ने वोट दिया और कातिल को मसीहा बना दिया।’’ उसके बाद वे प्रधानमंत्री पर व्यंग्य के ऐसे तीखे तीर चलाते हैं कि उससे जहां भाजपा विरोधियों के हौंसले बुलंद होते हैं वहीं मोदी भक्त सुनकर दंगे पर उतर सकते हैं।
`` मिसाल दी जाती है कि छोटा मुंह बड़ी बात। लेकिन यहां तो बड़ा मुंह छोटी बात हो रही है। प्रधानमंत्री नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। अरे 1.31 अरब के वजीरे आजम भूखे को रोटी दो। नंगे को कपड़ा दो। कब्रिस्तान और श्मशान मत दो। गुजरात में बेगुनाहों को बहुत श्मशान दिए है प्रधानमंत्री ने। बादशाह हमारी भैंसिया नहीं भूले। लेकिन अपनी पत्नी को भूल गए। बादशाह झूठा नहीं होता। अगर झूठा होता है तो बादशाह नहीं होता। पहले कहा शादी नहीं की। बाद में जब पत्नी सामने आई तो कहा पहले ही छोड़ दिया था। अरे शादी तो भगवान रामचंद्र ने भी की थी। क्या आप उनसे भी बड़े हो गए। अगर आरएसएस वालों की तरह सब लोग शादी करना बंद कर दें तो यह दुनिया ठहर जाएगी।  इसलिए भागो नहीं सच्चाई बताओ। बीबी को क्यों नहीं ला रहे हो। जब तक भारत का पीएम अपनी पत्नी को न्याय नहीं देता वह देश की बहू बेटियों को न्याय नहीं देता।’’
वे गाय, गंगा और गीता पर भी टिप्पणी करते हैं और उसकी सांप्रदायिक व्याख्या की आलोचना करते हुए मुसलमानों को उनसे और भारत की साझी विरासत से जोड़ते हैं। इस दौरान वे कुरान की आयत भी पढ़ते हैं और लोगों के जज्बात को उस ऊंचाई तक ले जाते हैं, जहां तक उनका हेलीकाप्टर उड़ता है। बाद में जब वे स्थानीय प्रत्याशी जयशंकर पांडेय का हाथ पकड़ कर उनके लिए वोट मांगते हैं तो हिंदू- मुस्लिम एकता के योद्धा जयशंकर पांडेय की आंखों में आंसू आ जाते हैं और भीड़ में उत्साहित कार्यकर्ता उछल- उछल कर एक दूसरे के गले मिलते हैं।  
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  • बागियों को शह देते मुलायम
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