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अगला राष्‍ट्रपति कौन ?

नई दिल्ली . जल्‍द ही यह सवाल पूछा जाएगा कि देश का अगला राष्‍ट्रपति कौन होगा. हालांकि, भाजपा के भीतरखाने में वरिष्‍ठ भाजपाई मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्‍वराज के नाम को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है. आश्‍चर्य की बात है कि इस बार भी पार्टी की ओर से लालकृष्‍ण आडवाणी के नाम पर चर्चा नहीं की जा रही है. 

बता दें कि जुलाई 2012 में भारत के राष्‍ट्रपति बनने वाले प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल अब समाप्‍त होने को है. ऐसे में राष्‍ट्राध्‍यक्ष के अगले नाम की चर्चा तेज हो गई है. पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, जोशी और सुषमा के अलावा इस पद के लिए लोकसभा अध्‍यक्ष सुमित्रा महाजन और झारखंड की गवर्नर द्रौपदी मुरमू के नाम पर भी चर्चा हो रही है. 
उम्‍मीद की जा रही है कि पांचों राज्‍यों के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद इन सभी नामों को लेकर भाजपा व आरएसएस के बीच मंत्रणा की जाएगी. 
वरिष्‍ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की उम्र 83 साल है. वह जब मात्र दस वर्ष के थे तभी उन्‍होंने आरएसएस का दामन थाम लिया था. साथ ही, उनके नाम पर राम मंदिर के लिए जोरदार आंदोलन करने का भी श्रेय दर्ज है. वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी के भी करीबी रहे हैं. उन्‍होंने ही वर्ष 1992 में कन्‍याकुमारी से श्रीनगर तक एकता यात्रा आयोजित की थी. वहीं, 1975 में जब तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था तब जोशी को 19 महीने तक जेल में रहना पड़ा था. 
इधर 65 वर्षीय केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज भी इस पद की दौड़ में काफी मजबूत दिख रही हैं. दरअसल, पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस भी सुषमा के नाम पर मुहर लगा सकता है क्‍योंकि वह इनकी छवि को काफी प्रभावित है. साथ ही, सुषमा स्‍वराज को देश के सर्वोच्‍च पद पर बैठाकर खुद पर लगने वाले महिला विरोधी सोच को भी मात देने के लिए आरएसएस अपनी हामी दे सकता है. सुषमा स्‍वराज की अन्‍य दलों में भी काफी अच्‍छी छवि रही है. ऐसे में राष्‍ट्रपति पद के लिए चुने जाने की राह भी काफी आसान दिख रही है.
उधर, 74 वर्षीय सुमित्रा महाजन भी इस पद के सुयोग्‍य हैं. वह आठ बार मध्‍य प्रदेश के इंदौर से सांसद चुनी जा चुकी हैं. उनकी भी सभी दलों में खासी पैठ है. आरएसएस में भी उनका काफी सम्‍मान है. 
वहीं, झारखंड की वर्तमान राज्‍यपाल 59 वर्षीया मुरमू के नाम पर भी मंथन का दौर चल रहा है. उड़ीसा के आदिवासी समाज से निकलकर अपनी छवि बनाने वालीं मुरमू को राष्‍ट्रपति बनाने से भाजपा की आदिवासियों के बीच पकड़ मजबूत होगी. उनका राजनीतिक करियर वर्ष 1997 में शुरू हुआ था. हालांकि, इस बार भी आडवाणी को तवज्‍जो न मिलने से उनके करीबी नाराज हैं. 
 
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