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एनडीटीवी को घेरने की कोशिशे और तेज वे भी लड़ाई के लिए तैयार है ! छात्र नेताओं को जेल में यातना ! मेधा पाटकर और सुनीलम गिरफ्तार !
मोदी की खामोशी पर शिबली हैरान

रंजीव 

आजमगढ़. दिल्ली विश्‍वविद्यालय की छात्र राजनीति में रामजस कॉलेज की घटना और उसके बाद छात्रा गुरमेहर कौर के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की मुहिम से उपजे घटनाक्रम की गूंज सुदूर आजमगढ़ के मशहूर शिबली कॉलेज तक भी पहुंची है. यहां के छात्र-छात्राओं के समूह से बातचीत में सबने कहा कि जिस तरह से विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में एक खास विचारधारा को स्थापित करने की जबरिया कोशिशें हो रहीं हैं वे थमनी चाहिये और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हस्तक्षेप करना चाहिए क्योंकि वे ‘देश के सरपरस्त हैं.’ 
कॉलेज की एमए की छात्रा फारेहा खां ने कहा, ‘मोदी जी को समाज में एकता पर ज्यादा जोर देना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. उनकी सरकार बनने के बाद सियासत में मजहब का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है. उन्हें संवेदनशील मामलों पर बोलना चाहिए. दिल्ली विश्वविद्यालय के पूरे घटनाक्रम में उनकी खामोशी अच्छी नहीं. कई छात्राओं ने कहा कि किसी को भी अपनी राय रखने का हक होना चाहिए और उससे नाइत्तफाकी होने पर हिंसक होना अच्छा संकेत नहीं.’ बकौल फारेहा, आगे का वक्त ठीक नहीं लगता पर वक्त ही बताएगा कि हालात कैसे होंगे. 
इसी कॉलेज की छात्रा अदिबा परवेज ने कहा, ‘सम्राट अशोक व बादशाह अकबर के बारे में हमने पढ़ा है कि वे अपनी रियाया का हाल लेते थे और फिर उनकी समस्याओं का समाधान करते थे. बतौर प्रधानमंत्री मोदी को भी यह करना चाहिए.’ 
शिबली के विद्यार्थी जेएनयू में जाकर आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन सभी को इसका मलाल  है कि आजमगढ़ के साथ आतंक का ऐसा ठप्पा लगा दिया गया है कि उन्हें आगे कुछ बेहतर करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. छात्र हनुमंत यादव कॉलेज की ओर से राज्य की कबड्डी टीम में शामिल हैं. उन्होंने कहा, जब भी टीम बाहर जाती है तो यूपी के बाकी जिलों के खिलाड़ियों से तो खास पूछताछ नहीं होती लेकिन आजमगढ़ के नाम पर मेरी डबल चेकिंग होती है. जेएनयू के छात्र नजीब के गायब हो जाने का जिक्र करते हुए मोहम्मद माज, नासिर खां, जरीन और नाजिश ने कहा कि केंद्र सरकार को उसे तलाशने की हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए थी. 
शिबली की इस युवा पीढ़ी को विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव का चेहरा ज्यादा प्रभावित करता है. कई छात्राओं ने कहा कि बतौर लड़की उनके लिए सुरक्षा सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है और वह चाहेंगी कि जो भी नई सरकार बने वह इस पर सबसे ज्यादा जोर दे. ऐसी सरकार बने जो सभी वर्गों का ख्याल रखे न कि सिर्फ एक वर्ग का. युवाओं के इस समूह ने खुल कर कहा कि नोटबंदी का फैसला सही नहीं था क्योंकि न सिर्फ उससे लोगों को परेशानी हुई बल्कि उसका कोई फायदा भी नहीं दिख रहा है. 
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  • एनडीटीवी को घेरने की कोशिशे और तेज
  • वे भी लड़ाई के लिए तैयार है !
  • छात्र नेताओं को जेल में यातना !
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