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गैर भाजपावाद की नई पहल

अंबरीश कुमार 

नई दिल्ली .उत्तर प्रदेश चुनाव की करारी हार के बाद गैर भाजपा दलों के बीच नए सिरे से संवाद शुरू हो चुका है .कांग्रेस ,समाजवादी पार्टी ,बहुजन समाज पार्टी ,तृणमूल कांग्रेस ,जनता दल यू से लेकर राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों के बीच अनौपचारिक संवाद शुरू हो चुका है .कई मुद्दों पर एका की उम्मीद है .जिसमे राष्ट्रपति चुनाव भी शामिल है .खासबात यह है कि गैर दलीय आंदोलनकारी समूह भी अलग अलग राज्यों में विभिन्न मुद्दों को लेकर एकजुट हो रहे हैं .जयपुर में दस अप्रैल को गो रक्षक दल की हिंसा में मारे गए एक गो पालक के मुद्दे पर राज्य के ज्यादातर आंदोलनकारी समूह जब एकजुट हुए तो उनके बीच अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई इनमे ज्यादातर जन संगठन जयप्रकाश आंदोलन से निकले हुए है .महाराष्ट्र के पुणे में समाजवादी संगठनों के देशभर से आए चार सौ युवा कार्यकर्ताओं ने कई मुद्दों पर एकसाथ पहल करने का निर्णय लिया है .उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद विश्विद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और धुर वामपंथी नेता अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने गैर भाजपा ताकतों को एक मंच पर लाने के लिए जनमंच का गठन किया है .जनमंच किसान ,नौजवान से लेकर मजहबी गोलबंदी के खिलाफ लोगों को लामबंद करेगा .साथ ही सभी दलीय और गैर दलीय संगठनों से संवाद भी शुरू करेगा .यह बानगी है कुछ राज्यों की .इस तरह की पहल देश के दर्जन भर राज्यों में अलग अलग मुद्दों को लेकर हो रही है .पर दलीय पहल पर सभी की नजर है .
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी से मुलाक़ात कर अपना नजरिया साफ़ कर दिया है .वैसे भी अखिलेश यादव ने चुनाव नतीजों के आने से पहले ही यह कह दिया था कि वे जरूरत पड़ने पर बसपा अध्यक्ष मायावती से हाथ मिलाने में संकोच नहीं करेंगे .चुनाव नतीजों के बाद अब इन दोनों दलों के बीच संवाद की उम्मीद बढ़ गई है .इस बीच जनता दल यू ने कुछ राजनैतिक दलों के नेताओं से अनौपचारिक बातचीत कर राजनैतिक माहौल का जायजा लिया .इसमें वामपंथी दल भी शामिल थे .दूसरी तरफ ममता बनर्जी भी विपक्षी एकता के पक्ष में हैं .बंगाल में भाजपा  ममता को घेरने के लिए हर हथकंडा इस्तेमाल कर रही है .ऐसे में विपक्षी एकता हुई तो ममता बनर्जी को उसका फायदा मिल सकता है .दरअसल विपक्षी दलों के सामने फिलहाल दो मुख्य एजंडा है .एक राष्ट्रपति का चुनाव तो दूसरा ईवीएम का मुद्दा .यह बात अलग है कि ईवीएम के सवाल पर उतने दल साथ नहीं है जितने अन्य मुद्दों पर .लोकसभा चुनाव का मुद्दा इसके बाद का है .ईवीएम के सवाल पर बसपा ,आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ज्यादा मुखर है तो समाजवादी पार्टी भी समर्थन में तो है पर बहुत मुखर नहीं है .पर राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर इनमे एकता की उम्मीद ज्यादा है .हाल ही में एक कार्यक्रम में पत्रकार कुलदीप नैयर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार का नाम राष्ट्रपति के लिए बेहतर बताया तो उनके नाम की चर्चा शुरू हो गई है .जनता दल यू का समर्थन तय है .ऐसे में अन्य विपक्षी दलों का भी समर्थन मिल सकता है . इस चुनाव से भी विपक्षी एकता की उम्मीद बन रही है .
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