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गहराने लगा है अकाल का संकट


जनादेश ब्यूरो
नई दिल्ली,  जुलाई- सावन चल रहा है लेकिन इसका पता नहीं चल रहा साल-2004 की तरह इस साल भी मॉनसून ने धोखा दे दिया है। बारिश पहले तो काफी देर से आई और आई भी तो आधी अधूरी। जी हां उत्तर भारत में अबतक करीब 46 फीसदी कम बारिश हुई है और आने वाले दिनों में भी हालात बेहतर होते नहीं दिखते। लिहाजा मंडरा रहा है खतरा। पहले सूखे का और फिर अकाल का।
मौसम विभाग के मुताबिक 6 जुलाई तक उत्तर भारत यानि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 44 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। ये वो इलाका है जिसमें देश का अन्न का कटोरा यानि पश्चिमी यूपी, पंजाब और हरियाणा भी शामिल हैं। मॉनसून के पैटर्न को देखते हुए मेट डिपार्टमेंट ने आगाह किया है कि ये साल मुश्किल भरा हो सकता है क्योंकि सूखा पड़ने की पूरी आशंका है।
नेश्नल क्लाइमेट सेंटर, पुणे के डायरेक्टर डी। एस। पई ने कहा कि उत्तर भारत को छोड़कर बाकी जगह हालात में सुधार हो रहा है, लेकिन उत्तर भारत में हालात बेहतर होने की बजाए और बिगड़ते जा रहे हैं। इन राज्यों में सूखे की स्थिति इसलिए भी बन गई है क्योंकि यहां प्री मॉनसून बारिश न के बराबर हुई है। मौसम विभाग का जो पूर्वानुमान था उसके मुताबिक अगले एक हफ्ते तक यहां बारिश होने की उम्मीद भी कम है। जाहिर है इससे खरीफ फसलों की बुआई पर बेहद बुरा असर पडेगा। धान जो खरीफ फसलों का मुख्य हिस्सा है वो कम होगा। बाजरा, ज्वार, दलहन और पशु चारे की फसल में भी कमी होगी। पानी की कमी के चलते खेतों में खड़ी गन्ने और कपास की फसल भी प्रभावित होगी।
2 जुलाई तक पूरे देश में 43 फीसदी कम बारिश हुई हालांकि 7 जुलाई तक ये प्रतिशत घटकर 37 पर आ गया लेकिन उत्तर भारत में यह कमी 2 फीसदी और बढ़ गई यानि उत्तर भारत में 7 जुलाई तक बारिश 46 फीसदी घट गई। अब मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि 9 जुलाई से इस इलाके में पुरवाई चलने लगेगी जिससे बारिश होगी और तापमान में कमी आएगी। लेकिन यह बारिश सब जगह समान रूप से होगी ये मुमकिन नहीं लगता।
सरकार को अब भी यकीन है कि अगर पानी और बिजली वक्त पर मुहैया हो जाए तो खरीफ फसलों की 80 फीसदी बुआई हो सकती है लेकिन जब बारिश ही नहीं होगी तो बिजली और पानी कैसे आएंगे। खराब मॉनसून देश की तरक्की की रफ्तार को भी बिगाड़ रहा है। योजना आयोग ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में विकास के अनुमान के घटने के संकेत भी दिए हैं। वजह साफ है, अगर देश में मॉनसून कमजोर रहा तो फिर अनाज की पैदावार कम होगी और इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मंदी पहले ही विकास की रफ्तार को लगातार धीमा कर रही थी। अब मॉनसून में देरी ने हालात इतने खराब कर दिए हैं कि योजना आयोग 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए सारे अनुमान बदलने जा रहा है। इस बात के संकेत भी दिए जा रहे हैं कि मिड टर्म रिव्यू में विकास दर के अनुमान घट जाएंगे। यानि जितनी उम्मीद है उससे कम विकास दर हासिल होगी। मिड टर्म रिव्यू में 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान विकास दर सालाना औसत अनुमान 9: से घटाई जा सकती है।

 


 

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