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प्रतिभा का पूरा संग्रहालय थे किशोर कुमार
हिमांशु बाजपेयी,
भारतीय सिनेजगत के शायद सबसे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के बतौर किशोर कुमार अक्सर याद आते हैं लेकिन कभी कभी उन्हें याद करना अनिवार्य हो जाता है । जैसे की ४ अगस्त को उनके जन्मदिन पर । १९६१ में सलिल चौधरी फ़िल्म हाफ टिकट के लिए एक गीत रिकॉर्ड कर रहे थे ..ये एक युगल गीत था जिसमें लता और किशोर साथ साथ गाने वाले थे, उस ज़माने में मिक्सिंग तकनीक नही थी इसलिए युगल स्वर एक साथ ही रिकॉर्ड होता था , लता चूंकि बड़ी गायिका थीं इसलिए उनके पास समय की कमी होती थी । उस दिन भी लता नही आ सकीं । अचानक किशोर ने कहा की गाना रिकॉर्ड हो जाएगा , नारी स्वर भी मिल जाएगा, मैं करूँगा प्ले-बक । उसके बाद तो आ के सीधी लगी...की सफलता से सब परिचित हैं । इतनी प्रतिभा और इतना साहस फिलम इंडस्ट्री में सिर्फ़ किशोर के पास ही था ।
खंडवा में पैदा हुए किशोर के लिए फ़िल्म जगत की राह हलाँकि उतनी दूर की कौडी नही थी क्यूंकि उनके बड़े भाई अशोक कुमार पहले ही स्थापित अभिनेता थे, लेकिन किशोर वहां जो मुकाम पाना चाहते थे वो वाकई मुश्किल था। शास्त्रीय संगीत से नावाकिफ ये शख्स फ़िल्म जगत में गायिकी का हुनर दिखाना चाहता था। जबकि उस ज़माने में रफी-तलत-मन्ना दे और मुकेश जैसे सीखे पढ़े लोग पहले ही मौजूद थे । उनके करियर की शुरुआत अभिनेता के तौर पर ही हुई १९४६ की फ़िल्म शिकारी से लेकिन उन्होंने इसके दो साल के भीतर ही जिद्दी फीलम के लिए पहला गीत गा लिया । १९५० से १९७० का पूरा स्वर्णकाल हांलांकि रफी के जलवों का ही काल है और रफी को छोड़ कर अगर बात करें तो भी मन्ना, मुकेश इस समय तक किशोर से आगे थे कारण था नौशाद, मदन-मोहन, आदि की रिवायती धुनें जिनमें किशोर कम ही फिट होते थे, लेकिन इस समय भी किशोर अपने अंदाज़ के गीतों के साथ लोगों के जेहन पर नक्श होते रहे , १९७० में जैसे ही फ़िल्म संगीत के मिजाज़ ने करवट ली किशोर भी छागए। वेस्टर्न बीट्स पर पंचम और किशोर की जूगल बंदी खूब सजती थी । आराधना, अमानुष, डॉन ,नमकहलाल, जैसी फिल्मों में उनकी गायिकी शबाब पर थी । ७ फिल्मफेयर भी पाये सुपर स्टार्स के इस गायक ने । किशोर दा आए थे गायक बन्ने लेकिन निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, अभिनेता , गीतकार भी बने । इस विविधता के लिए उन्हें भुलाया नही जा सकता । १९८७ में निधन होने के बाद भी किशोर के बाद की एक लम्बी पीढी उनकी याद दिलाती है जिसमें कुमार शानू, अभिजीत, उनके बेटे अमित कुमार, सुदेश भोंसले, बाबुल सुप्रियो जैसे बड़े नाम हैं । रफी शैली के सोनू निगम ने भी किशोर दा की यद्लिंग शैली का खूब उपयोग किया है । उनके गानों में अद्भुत नवीनता और ताजगी है जिसके कारण आज भी वे सबसे ज्यादा रीमिक्स किए जाते हैं । किशोर कुमार अपने आप में प्रतिभा का पूरा संग्रहालय कहे जा सकते हैं
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