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डगर कठिन है इस बार भाजपा की गुजरात में एक नेता का उदय तिकड़ी से घिरे तो बदल गई भाषा ! यहां अवैध शराब ही आजीविका है
छीना जा रहा है गरीबों का हक

 मान सिंह 

ललितपुर। मडावरा ब्लाक की 51 ग्राम पंचायतों मे लगभग 5० प्रतिशत दलित आदिवासी गरीबी का जीवन जीने को मजबूर हैं। एक तरफ आजीविका के लिए स्थायी व्यवस्था न होने से गरीब पलायन करने को मजबूर हैं तो वहीं उनके हक हुकूक भी सामन्तशाही की गठजोड़ के कारण नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की लूट खसोट का सिलसिला दलित नेतृत्व वाली सरकार में भी नहीं समाप्त हो सका। भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए जाब काडरें के पन्ने फाड़कर गायब करने तथा अमीरों को बीपीएल कार्ड बनाने के लिए दस्तावेजों में खुदबुर्द करने में सरकारी मशीनरी पारंगत है।
ललितपुर में जहां एक तरफ नरेगा से वंचित तबके को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। हालांकि इस बारे में जिले के कलेक्टर रणवीर प्रसाद ने दावा किया कि शासन की ओर से जनहित में चलाई जा रहीं योजनाओं का अक्षरश: पालन कराया जायेगा। योजनाओं में गड़बड़ी करने वाले बख्शे नहीं जाएगें। जाब कार्ड फाड़ने, नरेगा में मजदूरी नहीं मिलने सहित अन्य गड़बड़ियों की जांच करायी जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। 
लेकिन वहीं जिले में नरेगा को लेकर शिकायतों में कोई कमी नहीं आ रही है। इसकी बानगी देखने वाली है। मडावरा में महामाया आवास के लिए दो करोड़ पिछले वर्ष शासन ने दिए थे। इस रकम में 5०० परिवारों को आवास की सुविधा दी जानी थी, वह भी अधर में है। आवास की धनराशि को बंदरबांट किया जा रहा है। आवासों की धनराशि कहां कैसे खर्च की जा रही है, यह प्रक्रिया आम जनमानस की समझ से परे हैं। कई गांवों में आवास के लार्भाथियों से 5००० रूपए तक का कमीशन लिया गया है। दिदौनियां, पारौल, धौरीसागर, सकरा, बम्हौरीखुर्द, कुर्रट जैसे कुछ गांवों से शिकायतें आयीं तो अफसरों ने मामला रफा-दफा कर दिया। सामन्तशाही व नौकरशाही के गठजोड़ के दबाव से गरीब अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को भी बयां नहीं कर सकता है। डीडीओ ने स्थानीय कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की चेतावनी दी है लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा। 
भूमि माप एवं कब्जा दिलाओ अभियान चला कुछ लोगों को कब्जा मिला, सैकडोंè दलित आदिवासी परिवार दबंगों के सामने, चालाक लेखपालों की कुटिल चाल के कारण कब्जे से वंचित रह गये, लेखपालों ने उच्चाधिकारियों को किसी न किसी बहाने से गुमराह कर दिया। गरीब की स्थायी आजीविका का संसाधन भूमि है। शासन की मंशा के अनुरूप ललितपुर में पटटेदारों को कब्जा नहीं मिल सका है। इकौना ग्राम पंचायत के 15 सहरिया अधिवासी कलुवा, लाले, मोती, खिलान, गेदिया,, रूपन, कोमल, कब्जा से वंचित रह गए हैं। अगर इन 15 परिवारों को 3० एकड़ जमीन में कब्जा मिल जाता तो गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का क्रम प्रारम्भ हो जाता। 
नरेगा के तहत गरीबों की जिंदगी में परिवर्तन लाने तथा पेट रोटी की प्राथमिकता व्यवस्था करने के लिए ग्राम पंचायतों में एक काम चलते रहना अनिवार्य है किन्तु गांव की गुटबन्दी और सरकारी पेशबंदी के बीच बंदरबांट जारी है। 
ब्लाक मडावरा के सौंरई गांव में हरप्रसाद प्रधान के खेत में कूप निर्माण कार्य कराया गया है जिसमें लगभग आधा सैकड़ा मजदूरों ने काम किया है, जिनमें से नन्ने भाई अहिरवार 15 दिन, रामा अहिरवार 25 दिन, चिमना अहिरवार 15 दिन, गेंदारानी अहिवार 24 दिन, ननुवा अहिरवार 15 दिन, बालकिशन 15 दिन, श्यामबाई 25 दिन, गनपत 35 दिन, प्यारी बहू 4० दिन, शिवकुमारी 45 दिन, शुगर 1० दिन, नन्ने भाई 2० दिन इंजन कार्य सहित 11 लोगों की कुल 284०० रूपए की मजदूरी का आज तक भुगतान नहीं किया गया है। मजदूर कई बार खण्ड विकास अधिकारी से भी मिले लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। सेके्रटरी का कहना कि चाहे जहां जाओ मजदूरी नहीं मिलेगी। ग्राम विकास अधिकारी मजदूरी का सारा पैसा हड़पे जा रहा है। 1० फर्जी लोगों के नाम काम में शामिल कर जितना बजट था पूरा पैसा भी निकाला जा चुका है। मजदूर परेशान हैं कोई उनकी कोई नहीं सुन रहा हैं। 
वन विभाग मडावरा रेंज में पिसनारी एवं गोरा एवं पिसनारी बीट में वृक्षारोपण के तहत लगभग 5० मजदूरों ने काम किया है। एक माह बीतने के बाद भी मजदूरी नसीब नहीं हुई। मजदूर मल्लन, रेखा, गयादीन, सुखलाल, गयादीन, श्रीराम, लक्ष्मन, जन्डू, राजू, रामा, रामलाल, मंझलीबहू, लल्लू, रामचरन, बारेलाल, गरईबहू, तन्सू, नरेश, गुडडी, हरपाल, गोकल, सरू, रामदयाल, गरईबहू, देवी, बलीराम, घनश्याम, सीताराम, मुल्ला, महेन्द्र, महेश सभी सहरिया जाति एवं राजूसिंह लोधी सहित लगभग 32 लोगों की लगभग 29,8०० रूपए मजदूरी शेष है। मजदूर परेशान हैं त्योहार में भी उन्हें मजदूरी नसीब नहीं हुई। 
पिसनारी गांव में भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए पंचायत मित्रों ने जाबकाडोर्ं के पेज फाड़ दिए। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ही रघुराज पुत्र बलवन्त सिंह कार्ड नं०-219, रामसिंह पुत्र मुलायम कार्ड नं०- 443, हन्दू पुत्र तिजई कार्ड नं०- 262, दलीपा पुत्र दौलता सहरिया कार्ड नं०- 229 सहित लगभग 15 जाबकाडरें के पेज पंचायत मित्र ने फाड़ दिये। इन जाबकाडरें में 1०० दिन का काम पूरा हो चुका था और यह एक साल उपयोग में नहीं लाये जा सकते थे इसलिए पेज फाड़कर पुन: उपयोग में लाने की नियत से यह किया गया। ग्रामीणों के शिकायत मिलने पर बीडीओ ने मौके पर पहुंचकर सारे मामले की जांच की और पेज फाड़े गए जाबकार्ड अपने साथ ले लिए। उन्होंने दोषी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद भी ग्रामीण खण्ड विकास अधिकारी की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं। 
ग्राम पंचायत जलंधर में नरेगा के तहत दो कूपों का निर्माण कार्य कराया गया है। 5०-5० मजदूरों ने 2०-2० दिन काम किया है अभी तक मजदूरी नहीं दी गयी है। मजदूर वंशीलाल, करनलाल, जीराबल, जालम, विनोदकुमार आदि ने बताया कि कार्य की धनरशि सचिव एवं प्रधान ने मिलकर निकाल ली है। कुआं भी अधूरा पड़ा है। मजदूरी समय पर मिलने से मजदूरों की रोजी रोटी के लाले पड़ गये हैं। कई बार ब्लाक भी गए लेकिन कोई भी समस्या के निराकरण को तैयार नहीं हैं। गोलमाल कर सिर्फ गुमराह किया जा रहा है। 
 
 
 
 
 
 
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