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कोरोना दौर में सरकार बनी तो अब चुनाव भी !

पूजा सिंह

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजनीति में कोरोना की जगह उपचुनाव अब अहम होते जा रहे हैं. इसकी पहली बानगी उस समय देखने को मिली जब चौथे लॉकडाउन में प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने कोरोना प्रभावित जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन तीन श्रेणियों के बजाय केवल रेड और ग्रीन जोन में बांटने की घोषणा कर दी.दरअसल इस घोषणा से ऐसे अधिकांश जिले ग्रीन जोन में आ गये जो अब तक ऑरेंज थे. इनमें वे जिले प्रमुख हैं जहां उपचुनाव होने हैं. स्पष्ट है कि सरकार ने चुनावी तैयारियों की बाधा दूर करने के लिए यह बदलाव किया है.

उधर कांग्रेस ने भी उपचुनाव वाले इलाकों में अपना संगठन मजबूत करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस ने बीते दिनों जिन 11 जिलों में नये अध्यक्ष नियुक्त किये उनमें अधिकांश ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले जिले हैं. इनमें श्योपुर, ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम, गुना ग्रामीण आदि जिले शामिल हैं.


मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होने हैं जो दो विधायकों के निधन और 22 विधायकों की कांग्रेस से बगावत करने के बाद खाली हुई हैं. इन 24 में से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग से आती हैं, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है. कांग्रेस के बगावत करने वाले सभी 22 नेताओं को भाजपा का टिकट मिलना तय माना जा रहा है. ऐसे में कांग्रेस की नजर इन इलाकों के असंतुष्ट भाजपायी नेताओं पर है. भाजपा के जो नेता या जिनके परिजन नये टिकट वितरण से प्रभावित होंगे उनमें गौरीशंकर शेजवार, जयभान सिंह पवैय्या और राजेश सोनकर जैसे बड़े नेता शामिल हैं. ऐसे में कांग्रेस कम से कम अपने बागी मंत्रियों के खिलाफ बड़े भाजपायी नेताओं को टिकट देना चाहती है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी भारी दबाव से जूझ रहे हैं. कांग्रेस के नेताओं के पार्टी में शामिल होने के बाद पुराने दिग्गजों के लिए समस्या खड़ी हो गयी है. यही वजह है कि गोपाल भार्गव और राजेंद्र शुक्ला जैसे दिग्गज नेताओं तक को पहली बार बने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी. शिवराज को सिंधिया खेमे के कम से कम चार और नेताओं को मंत्री बनाना होगा. जाहिर है इससे भाजपा के बड़े नेताओं के मंत्री बनने की संभावना पर असर होगा.कांग्रेस नेता दावा करते हैं कि वे भाजपा के दो मौजूदा और 8-10 पूर्व विधायकों के साथ संपर्क में हैं. ऐसे में उम्मीद है कि उपचुनाव काफी करीबी मुकाबले वाले होंगे. सबकी नजर इस बात पर है कि ऊंट किस करवट बैठता है.


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