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कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है 'पोषण पुनर्वास केंद्र'

धर्मेंद्र कमरिया

 दतिया.कुपोषित बच्चों के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं. इनमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सुपोषण का कार्य हो रहा है. इन केंद्रों पर अति कुपोषित बच्चों का ख्याल रखा जाता है. यहाँ माताओं को भी पोषित आहार दिया जाता है.दतिया जिला चिकित्सालय में संचालित न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) केंद्र में हर महीने लगभग 10-15 बच्चों को पोषण सहायता मिल रही है. इस केंद्र की संचालिका शशि पुरोहित के अनुसार कुपोषित बच्चों के लिए ऐसे केंद्र संजीवनी साबित हो रहे हैं.

 

इस केंद्र ने काफी बच्चों को नया जीवन दिया है. मसलन, इंदरगढ़ तहसील के लहार हवेली की रहने वाली सपना विनोद दोहरे की बेटी चिंकी की उम्र लगभग तीन महीने की है. उसका वजन 4.225 किलोग्राम था. चिंकी को बेहद चिंताजनक स्थिति में यहाँ लाया गया था. केंद्र पर नियमित देखभाल तथा 14 दिन के पहले फॉलोअप के बाद उसका वजन बढ़कर 4.955 किलोग्राम हो गया. उसे अभी दो से तीन फॉलोअप और दिए जाएंगे.इसी तरह, पठ्ठापुरा निवासी सुमन पति बालकृष्ण प्रजापति की बेटी उर्मी का वजन 5.400 किलोग्राम से बढ़कर 6.140 किलोग्राम हो गया है. वंदना बलवीर अहिरवार ग्राम सड़वारा के बेटे मानव का वजन भी एनआरसी केंद्र पर भर्ती करने के बाद 5.06 से बढ़कर 5.900 हो गया है.

 

पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चे को भर्ती करने की उम्र डेढ़ से दो महीने के बीच होनी चाहिए. गौरतलब है कि भारत में कुपोषण की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार आया है. लेकिन भारत अभी भी दुनिया के उन देशों में शुमार है जहां पर विश्व के सबसे अधिक कुपोषित बच्चे पाए जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में लगभग 45 प्रतिशत मृत्यु कुपोषण के कारण होती है. और मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग ( डब्लूसीडब्लू ) के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कुपोषण के कारण रोज पांच वर्ष तक के 92 बच्चे दम तोड़ रहे हैं. वहीं मप्र का श्योपुर जिला तो भारत के इथोपिया नाम से विख्यात है. जिले में 2015-16 के बीच सर्वाधिक 685 बच्चों की पहचान की गई थी.लहार हवेली निवाली विनोद दोहरे बताते हैं कि उन्हें एनआरसी केंद्र पर आशा शशि भास्कर लेकर आई थीं, जहां उनकी बेटी का वजन 14 दिन के बाद 730 ग्राम बढ़ गया है.

एनआरसी केंद्र पर दी जाने वाली सुविधाएं !

अति कुपोषित बच्चे की पहचान करने के बाद उसे तुरंत केंद्र पर भर्ती करना.

भर्ती किए गए बच्चे की 24 घंटे उचित देखभाल करना.

बच्चों में संक्रमण न फैले, इसके लिए पांच दिन तक लगातार एंटीबायोटिक देना.

भर्ती किए गए बच्चे और उसकी मां की मुफ्त चिकित्सीय जांच तथा नियमित पोषित आहार प्रदान करना.

डिस्चार्ज होने के बाद हर 15 दिन के अंतराल पर 3 फॉलोअप सुनिश्चित करना जिसमें चिकित्सीय परीक्षण भी शामिल हो.

बच्चे को 14 दिन भर्ती रखने पर शासन द्वारा 120 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बच्चे के परिजन को भुगतान किया जाता है.

-शशि पुरोहित, संचालिका एनआरसी केंद्र, दतिया ने जैसा बताया

पोषण पुनर्वास केंद्र पर अति कुपोषित बच्चों की पहचान करने के बाद लाया जाता है.यहाँ उनकी नियमित चिकित्सीय देखभाल करके पोषित आहार दिया जाता है. इससे उनका वजन बढ़ जाता है. लेकिन यहां से डिस्चार्ज होने के बाद उन बच्चों की स्थिति फिर बिगड़ने लगती है. इसका सबसे बड़ा कारण कुपोषण के प्रति जागरुक न होना है. बच्चों की माताएं समय पर स्तनपान भी नहीं करा पाती हैं. इसलिए ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

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