जनादेश

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ओली सरकार पीछे हटी क्योंकि बहुमत नहीं रहा !

यशोदा श्रीवास्तव

काठमांडू .ओली सरकार बहुमत से दस अंक पीछे हो गई. नक्शे को लेकर पीछे हटने की यह प्रमुख वजह हो सकती है क्योंकि कुछ नये संशोधन के लिए बहुमत का होना जरूरी होता है. कुछ माह पहले प्रमुख मधेशी नेता व ओली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे उपेंद्र यादव ने अपने समर्थक सांसदो के साथ सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. 

नेपाल और भारत के बीच ताजा विवाद के पीछे चीन हो सकता है लेकिन भारतीय मीडिया दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मुद्दे को इस तरह परोस रहा है जैसे मसला भारत पाकिस्तान के बीच का हो.बहुचर्चित लिपुलेख और कालापानी को लेकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच का मुद्दा पीछले दो तीन दिनों से भारतीय समाचार संसार की सुर्खियां बनी हुई है.नेपाल को भड़काने और धमकी देने वाले अंदाज में खबरें चल रही है.भारत और नेपाल के बीच की खबरें परोसते समय भारतीय मीडिया यह भूल जाती है कि ये दो ऐसे पड़ोसी राष्ट्र हैं जिससे एक दूसरे का रोटी बेटी का रिश्ता है ही,ये सामाजिक, सांस्कृतिक और काफी हद तक राजनितिक दृष्टि से भी एक दूसरे के नजदीक है. इतना ही नहीं तराई के 22 जिलों में बसने वाली नेपाल की बड़ी आबादी का झुकाव भारत के पक्ष में रहता ही है, नेपाल के हिंदू राष्ट्र के हिमायती राजनितिक दलें भी भारत को अपना रोलमाडल मानती हैं.इस आधार पर यह मानना ही होगा कि चीन के लाख चाह लेने भर से नेपाल भारत से कभी अलग नहीं हो सकता.

हालाकि नेपाल ने लिंपियाधुरा, लिपुलेख तथा कालापानी को लेकर जारी नक्शे की वैधानिक प्रक्रिया रोक दी है जो होना ही था.नेपाल के इस कदम पर भारत में जैसी भी प्रतिक्रिया हो लेकिन सच ये है कि इसके पीछे नेपाल के वे राजनितिक दल हैं जो हरहाल भारत के पक्ष में खड़े रहते हैं. यहां यह भी गौरतलब है कि कुछ माह पहले प्रमुख मधेशी नेता व ओली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे उपेंद्र यादव ने अपने समर्थक सांसदो के साथ सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. इसका असर यह हुआ कि नेपाल प्रतिनिधि सभा में ओली सरकार बहुमत से दस अंक पीछे हो गई. नक्शे को लेकर पीछे हटने की यह प्रमुख वजह हो सकती है क्योंकि कुछ नये संशोधन के लिए बहुमत का होना जरूरी होता है.

 जानकार बताते हैं कि मानसरोवर के मुख्य मार्ग तक भारत द्वारा सड़क बनाये जाने से खफा नेपाल का अपने नए नक्शे में  केवल लिंपियाधुरा, लिपुलेख, कालापानी को अपने भूक्षेत्र का हिस्सा दर्शाया है. ध्यान देने की बात है कि नेपाल ने सिर्फ उत्तराखंड से लगी 805 कीमी की सीमा में ही बदलाव किया है.लद्दाख,उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम समेत चीन से लगी सीमा में कोई बदलाव नहीं किया. इसे इस रूप में भी देखा जाना चाहिए कि नेपाल भारत से टकराव की नियत नहीं रखता.

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