सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला

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सरगुजा की मांड नदी का बालू खोद डाला

मनीष कुमार 

सरगुजा .छत्तीसगढ़ में भी नदियां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं ,छत्तीसगढ़ -झारखंड पर कनहर नदी हो ,कोरिया जिले में मध्प्रदेश की सीमा पर हसदेव नदी हो या सूरजपुर की महान नदी या फिर महानदी में मिलने वाली सरगुजा की मांड नदी. रेत तस्करों ने लगभग सबकी स्थिति एक जैसी कर दी है. जैव विविधता को समाप्त करने में इन रेत माफ़ियाओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी है.लगातार ग्रामीण शिकायतें कर रहे हैं पर प्रसाशन इन राजनैतिक रसूख़ रखने वालों के आगे नतमस्तक नज़र आती है . ऐसा ही कुछ मामला सरगुजा में है देखिये रेत तस्करों की हिम्मत, और विचार करिये यदि इस तेजी से नदियों से बालू निकाला जा रहा है तो प्र्शासन आख़िर क्या कर रहा है ?

सरकारें बदल गयीं हालात वही है. सरगुजा के मैनपाट से निकलने वाली मांड नदी में पूरे लॉक डाऊन अवधि में रेत तस्करों ने जमकर बालू निकाला है ,दुष्परिणाम यह हुआ की नदी में बेतरतीब तरीके से उत्खनन के कारण कोई जगह बहुत गहरा हो गया है .यहां नदी में स्नान करने वाले छोटे छोटे बच्चों को डूबने का ख़तरा बना रहता है ,बच्चों के आये दिन गहराई में डूबने और ग्रामीणों द्वारा उन्हें बचाने की घटना देखने को मिलती है. प्रतापगढ़ के सरपंच के मुताबिक़ दर्जनों शिकायते स्थानीय एस डीएम ,तहसीलदार यहां तक की सरगुजा कलेक्टर को की जा चुकी है , बालू परिवहन में लगे ट्रकों के कारण इनके पंचायत की सीसी रोड तक उखड़ गयीं पर किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं की रेत माफियाओं के ख़िलाफ़ कोई एक्शन ले सके.

इस पूरे मसले पर हमने लगातार सरगुजा के नवपदस्थ कलेक्टर संजीव झा से उनकी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया पर कलेक्टर ने हमारे कई बार फ़ोन लगाने पर भी कोई जवाब देना उचित नहीं समझा. वहीँ ,एस डी एम् सीतापुर दीपिका नेताम भी घटना स्थल पर अपने तहसीलदार को भेज कार्रवाई करने की बात कहती रही पर जब तक हम इस उत्खनन वाले गाँव प्रतापगढ़ में रुके तब तक कोई भी अधिकारी वहां नहीं पहुंचा जो यह बताता है की पुरे मामले में किस तरह राजनितिक रसूख़ का फ़ायदा रेत माफिया उठा रहे हैं.सीतापुर के तहसीलदार ने पूछने पर वही घिसा पिटा बयान की लिखित शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी .कैमरे पर बोलकर अपना पल्ला तो झाड़ लिया पर कैमरा बंद होते ही तहसीलदार का दर्द भी छलक उठा और एक आम आदमी की तरह बताने लगे की रेत उत्खनन करने वालों का बहुत लंबा पहुँच है.इसी सब से मैं टूट चुका  हूं .मेरे साथ भी अन्याय हो रहा है.सीतापुर के तहसीलदार बीआर खांडे ने आफ द रिकार्ड ज्यादा बोले इस नदी के दोहन पर .


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