गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह

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गांव ,गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह

प्रसून लतांत

नई दिल्ली .गांधियन कलेक्टिव इंडिया की उपवास श्रृंखला में गांधी के विचारों में विश्वास रखने वाले और उसके अनुरूप काम करने वाले लोग पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं. उनकी सक्रियता से अब गांधी, गांव और गरीब को लेकर कुछ खास कर गुजरने की सूरत भी निकलती दिखाई पड़ रही है. गांधीयन कलेक्टिव इंडिया की उपवास श्रृंखला में पहले तो इसमें गांधी संस्थाओं और संगठनों से मुक्त लोग शामिल हुए लेकिन जब से इस का नियमित और अविराम सिलसिला चल पड़ा है तो गांधी संस्थाओं और संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल होने लगे हैं. पहली बार देखा जा रहा है उपवास के लिए अच्छी खासी संख्या में युवा वर्ग भी शामिल हो रहा है. नहीं तो गांधी जी की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष शुरू होने के पहले महात्मा गांधी की याद में बड़े बड़े आयोजन करने के लिए सरकारी घोषणाएं हो रही थीं और केंद्र और राज्य स्तर पर समितियों का गठन किया जा रहा था. साथ ही सरकारों से अलग थलग होकर गांधी से जुड़ी संस्थाएं और संगठन भी अपने सामर्थ्य भर कुछ करने के लिए एकांगी पहल कर रहे थे. शताब्दी आयोजनों की शुरुआत भी हो गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव आने और उसके बाद दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद देश भर में एक प्रकार की दुखद चुप्पी सी छा गई थी. गांधी जैसी बात करने वाले को भी देशद्रोही करार दिया जा रहा था. ऐसा लगने लगा था कि गांधी के देश में ही गांधी की बात करना गुनाह है. गांवों की और गरीबों की जरूरी बातें भी स्मार्ट शहरों के शोर में गुम हो गई थीं. संसद की चर्चा से भी गायब. मीडिया सहित फिल्म और धारावाहिकों में भी नहीं. यह तो कोरो ना के प्रकोप पर रोक लगाने के लिए लागू लॉक डाउन के दौरान देश के आम लोग जब सड़कों पर अपने गांवों की ओर निकल पड़े तो शहरों के बढ़ते वैभव का खोखला पन उभर कर सामने अा गया और गांव की चर्चा तेज हो गई. करोड़ों की संख्या में निकले आम लोगों ने पैरों से हजारों किलोमीटर चल के गांव पहुंचने की हिम्मत दिखा कर फिलहाल इस समय देश की दिशा बदल दी है. गांव और गरीब इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं. ऐसे में पिछले एक महीने से गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह से जुड़ कर लोगों का शुरू हुआ व्यक्तिगत सत्याग्रह का सिलसिला भी निरंतर बढ़ता ही जा रहा है. नई सदी का व्यक्तिगत सत्याग्रह. पिछली सदी में जब ब्रिटिश हुकूमत भारत को दूसरे विश्व युद्ध में झोंकने की कोशिश कर रही थी. तब उसके विरोध के लिए महात्मा गांधी ने आचार्य विनोबा से व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए कहा था. विनोबा के बाद दूसरे व्यक्तिगत सत्याग्रह करने वाले नेहरू थे. व्यक्तिगत सत्याग्रह के कारण

गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह  गांधी,गांव और गरीबों के कल्याण के मुद्दों पर लोकशाही की आवाज को बुलंद करने का मंच बन गया है. रोज नए नए लोग जुड़ रहे हैं.

एक महीने पहले से हरेक दिन एक सत्याग्रही अलग अलग राज्यों से बैठ रहे हैं.

व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत 5 जून पर्यावरण दिवस की बिहार के चंपारण से शुरू हुई. सत्याग्रही द्वारा राष्ट्रीय उपवास श्रृंखला 2 अक्टूबर विश्व अहिंसा दिवस और महात्मा गांधी जयंती तक चलेगी. पहले  सत्याग्रही मोतिहारी के दिग्विजय कुमार हैं. उन्होंने उपवास कर सत्याग्रही की शुरुआत कर दी है. दिग्विजय गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह की राष्ट्रीय समिति के संयोजक हैं.

उपवास का मकसद श्रमिकों, किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार , समाज और स्वयं को झकझोर ना है बदलना है . ताकि कोरो ना से बच सकें और मजबूत हिंदुस्तान बन सकें. अब तक इस उपवास श्रृंखला में मणिपुर, गोआ, दिल्ली,तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल,मध्य प्रदेश,झारखंड,महाराष्ट्र,राजस्थान,उत्तर प्रदेश,ओडिशा,बिहार, छत्तीसगढ़,असम आदि राज्यों में एकल और सामूहिक रूप से तीस से अधिक सत्याग्रही उपवास पर बैठ चुके हैं.

गांधीयन कलेक्टिव इंडिया का कहना है कि यह पहल देश की मौजूदा राजनीति में अंतिम जन को केंद्र में लाना है और गांधी जी की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष पर गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए देश और दुनिया में फैले गांधी प्रेमियों को एक मंच पर लाकर एक बड़ी पहल करने की तैयारी को अंजाम भी देना है. उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रव्यापी उपवास श्रृंखला में शिक्षक, समाज कर्मी,कलाकार, लेखक,पत्रकार,वैज्ञानिक,पर्यावरणवादी और छात्र व युवा पूरे उत्साह से भाग ले रहे हैं. इनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं. अब तक के सत्याग्रहियों में वरिष्ठ समाज कर्मी दिग्विजय कुमार चंपारण बिहार, पी के शेरली और उनके पति एस मोहन केरल,निराकार भाई ओडिशा, राम कृष्णाप्पा कर्नाटक,टिकेंद्र भाई मणिपुर,संतोष कुमार द्विवेदी उमरिया मध्य प्रदेश, अंकित तिवारी प्रयागराज उत्तर प्रदेश, परिमालम पीटर चेन्नई तमिलनाडु,सुरेन्द्र कुमार मुजफ्फरपुर बिहार,विलयदी वेणुगोपाल केरल,कुमार कलानंद मणि गोवा,राधिका जोधपुर राजस्थान,संदीप पाण्डेय लखनऊ उत्तरप्रदेश,प्रशांत कुमार जांजगीर छत्तीसगढ़,विशाल लखनऊ उत्तरप्रदेश,संतोष कुमार प्रधान गुमला झारखंड,इनामुल हसन पांडिचेरी,सत्यम दिव्या खंडवा मध्य प्रदेश,जोएल हसन उदयपुर त्रिपुरा,अशोक चौधरी जोधपुर राजस्थान,प्रसून लतांत दिल्ली,अनीस कुमार भोपाल मध्य प्रदेश,सुरेश गहमरे असम, इंदीरम्मा तुमकुर कर्नाटक,काबितारानी पूरी ओडिशा,वी एम माईकल कोच्चि केरल, डॉ सीबी जोसफ वर्धा महाराष्ट्र, डॉ सुभाष चन्द्र कुरुक्षेत्र हरियाणा, डॉ मनोज मीता भागलपुर बिहार, भारती त्यागी और विदित त्यागी अहमदाबाद, गुजरात, चंदन पाल, कोलकाता पश्चिम बंगाल, सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के अध्यक्ष टी आर एन प्रभु सेवाग्राम, महाराष्ट्र, डॉ सुजाता चौधरी भागलपुर बिहार, डॉ सुधीर दिल्ली,दीपेंद्र वाजपई, भितिहरवा चंपारण और वंदना झा भागलपुर बिहार और जालपा शाह अहमदाबाद गुजरात आदि हैं. गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह की ओर से गांधी जयंती तक चलने वाले इस सत्याग्रह में कुल 119 सत्याग्रही शामिल होंगे. गांधी जयंती के दिन कुछ खास करने कि परिकल्पना कि जा रही है. इस बीच वेबीनार के जरिए कोरो ना सहित गांधी, गांव और गरीब के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के बारे में संवाद प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है. उपवास के दौरान हाथ से लिखे बैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है और पेड़ पौधे भी लगाए जा रहे 

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