अपना वादा भूल गए नीतीश

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अपना वादा भूल गए नीतीश

आलोक कुमार 

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 23 मार्च 2020 को उच्चस्तरीय बैठक की गयी. इस बैठक में कोरोना पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सहायता पैकेज देने का फैसला लिया गया. यह आशा व्यक्त की गयी कि कोरोना वाॅरियर्स सरकार के निर्देशों का पालन करें और  कोरोना वायरस पर मिलकर की विजय पाएंगे.सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को उनके 1 माह के मूल वेतन के समान प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. तीन माह गुजने के बाद भी कोरोना वाॅरियर्स को सहायता पैकेज देने का अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है.ये लोग 99 दिनों के चक्कर में पड़  गये.

अपर सचिव,स्वास्थ्य विभाग,बिहार,पटना के द्वारा दूरभाष पर दिये गये निर्देश के आलोक में कोरोना वायरस से उत्पन्न संक्रमण के रोक-थाम एवं इसके निरोधात्मक उपाय को देखते हुए मुख्यमंत्री जी के आवास पर पर वेंटिलेटरयुक्त अस्पताल के संचालन के लिए पटना मेडिकल काॅलेज अस्पताल,पटना के अन्तर्गत कार्यरत चिकित्सकों एवं परिचारिकाओं को मुख्यमंत्री आवास पर तीन पाली के लिए प्रतिनियुक्त किया जाता है. प्रथम टीम में डाॅ. आर.डी.सिंह, सह-प्राध्यापक, औषधी विभाग. डाॅ. राजेश कुमार, सहायक-प्राध्यापक, निश्चेतना विभाग और सोनी सिंह,परिचारिका श्रेणी ‘ए‘ आकस्मिकी.सभी का कार्यावधि सुबह 07ःबजे पूर्वाह्न से 02ः00 बजे अपराह्न तक. द्वितीय टीम में डाॅ. राजन कुमार, सहायक-प्राध्यापक, औषधी, डाॅ. विशाल वैभव निश्चेतना विभाग और सोनम,परिचारिका श्रेणी ‘ए‘ आकस्मिकी.सभी का कार्यावधि 02ः00 बजे अपराह्न से 09ः00 रात्रि तक.तृतीय टीम में  डाॅ.पंकज हंस, सहायक-प्राध्यापक, औषधी,डाॅ. अरूण कुमार शर्मा सहायक -प्रध्यापक निश्चेतना विभाग और सुनील कुमार ,परिचारिका श्रेणी ‘ए‘ आकस्मिकी. सभी का कार्यावधि09ः00 रात्रि से सुबह 07ःबजे पूर्वाह्न तक. अधीक्षक, पटना मेडिकल कालेज अस्पताल,पटना ने त्वरित कार्रवाई कर दी.मगर कोरोना वाॅरियर्स का प्रोत्साहन राशि देने का मसला लम्बित है.

लोकप्रिय जनादेश को बताया कि बुक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खिंचाई हुई कि अब आप में और अन्य नेताओं में कोई अंतर बाकी नहीं रहा. ऐसे में क्यों नहीं इस बार किसी और को मौका दे दिया जाये. जिस बिहार में डॉक्टर, नर्स, एंबुलेंस तथा अस्पताल में दवा व उपकरण के अभाव में मरीजों की मौत होते रहती है. वैसे में एक शख्स के पीछे छह डॉक्टर, तथा तीन नर्स को तैनात कर देना शर्मनाक ही है. पद पर रह कर अगर नेताओं की आदत इस कदर खराब हो जाएगी. तो पद से हटने के बाद क्या होगा ? सुविधा के अभाव में तो शायद ये लोग मानसिक रूप से तनावग्रस्त ना हो जाये. यह भी कहा गया कि जब तक सूबे के मुखिया के साथ-साथ सभी जिलों के हाकिमों को कोरोना संक्रमण नहीं हो जाता.तब तक शायद राज्य में कोरोना का असर नहीं माना जाएगा और तब तक इसे लेकर कोई खास रणनीति नहीं बन पानी तय है. बीते मंगलवार को सूबे के नीतीश कुमार की भतीजी को कोरोना क्या हुआ, कि उनके आवास पर अस्पताल का संचालन करना ही शुरु कर दिया गया.  साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड के नामचीन चिकित्सकों को भी तैनात कर दिया गया है.आखिर कुछ समझ में नहीं आता है कि एक शख्स के लिए इतनी तैयारी क्यों ? जो व्यक्ति जनता के वोट से आज इस मुकाम तक पहुंचा है. तो उसके लिए जनता को इग्नोर कर ऐसी सुविधा क्यों ?इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर अब कोरोना वायरस का हॉस्पिटल नहीं खुलेगा. पटना मेडिकल कालेज अस्पताल,पटना के अधीक्षक ने मामले को लेकर एक चिट्ठी भी जारी की थी.लेकिन अब मामले पर यू-टर्न ले लिया है.

तीन सदस्यीय टीम गठित की गयी है.यह टीम अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच पाया है. कोरोना वाॅरियर्स इनाम पाने को आंख बिछा दिए है. कोरोना वाॅरियर्स लोगों का कहना है कि राजस्थान में भी कोरोना वायरस संक्रमितों के उपचार में लगे चिकित्सकों एवं नर्सिगकर्मियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने की स्वीकृति 23 मार्च को जारी की गई थी, लेकिन यह राशि लैप्स हो गई. चिकित्साकर्मियों को नहीं मिल सकी.राशि लैप्स होने से अधिकारी व कर्मचारियों में रोष है. अधिकारी-कर्मचारियों का कहना है कि एक और कोरोना योद्धा अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा कर रहे हैं, दूसरी ओर ट्रेजरी की लापरवाही से ये राशि नहीं मिल सकी है. नवीनतम जानकारी के अनुसार सीएमएचओ डॉ. बीएस तंवर का कहना है कि राशि के लिए फिर से आवेदन किया है. बजट आने पर एक माह में राशि सभी के खातों में पहुंच जाएगी.


बिहार में कोरोना महामारी के खिलाफ संघर्ष कर रहे कोरोना वारियर्स को उपलब्ध कराये जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन और सुरक्षा उपायों को लेकर पटना हाइकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से दो जून तक विस्तृत जानकारी मांगी थी. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने लॉ स्टूडेंट शिवानी कौशिक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया था.


साथ ही पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह जानना चाहा है कि अन्य राज्यों में कोरोना वारियर्स को किस तरह की प्रोत्साहन राशि और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करायी जा रही है! इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस कर्मी, सफाई कर्मी भी कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में संघर्षरत हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना कोरोना मरीजों का लगातार इलाज किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लगाये गये लॉकडाउन और अनलाॅक में पुलिस की भूमिका भी बड़ी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा सफाई कर्मचारी और अन्य सेवा देनेवाले लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है. इसलिए उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन और सुरक्षा की व्यवस्था करना बहुत आवश्यक है.इस मामले पर सुनवाई जारी है.ट्र्ेन एवं बस से सफर करके कर्तव्य निभाने वाली एएनएम का कहना है कि कार आरक्षित करके स्वास्थ्य केन्द्र में जाता है.लाॅकडाउन के समय कार चालक एक दिन का 3000 भाड़ा वसूल करते थे.अनलाॅक में 1000 भाड़ा ले रहे हैं.सरकार जल्द से जल्द निर्णय करने प्रोत्साहन राशि दें.


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