भूटान के जरिए दबाव बना रहा है चीन

आखिर वह दिन आ ही गया ! बिहार में कब चुनाव होगा? मंदिर निर्माण का श्रेय इतिहास में किसके नाम दर्ज होगा ? राष्ट्रीय कंपनी अधिनियम पंचाटः तकनीकी सदस्यों पर अनावश्यक विवाद बहुतों को न्यौते का इंतजार ... आत्महत्या की कहानी में झोल है पार्षदों को डेढ़ साल से मासिक भत्ता नहीं मिला पटना के हालात और बिगड़े गांधीवादियों की चिट्ठी सोशल मीडिया में क्यों फैली ? अमर की चिंता तो रहती ही थी मुलायम को चारण पत्रकारिता से बचना चाहिए तो क्या 'विरोध' ही बचा है आखिरी रास्ता पटना नगर निगम के मेयर सफल रहीं अमर सिंह को कितना जानते हैं आप राजस्थान का गुर्जर समाज किसके साथ शिवराज समेत चार मंत्रियों को कोरोना कम्युनिस्ट भी बंदर बांट में फंस गए पूर्वोत्तर में भी बेकाबू हुआ कोरोना किसान मुक्ति आंदोलन का कार्यक्रम शुरू राजकमल समूह में शामिल हुआ हंस प्रकाशन

भूटान के जरिए दबाव बना रहा है चीन

प्रभाकर मणि तिवारी

लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प की वजह से भले भारत-चीन सीमा विवाद सुर्खियों में रहा हो, देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाके में बीते कोई सात दशकों से इस मुद्दे पर अनबन चलती रही है. चीन सिक्किम के भारत में विलय के अवैध करार देते हुए वर्ष 2003 तक उस पर दावा करता रहा है. पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को तो वह अब भी दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है. तिब्बत से लगी लगी सिक्किम की नाथुला सीमा पर अक्सर छोटे-मोटे विवाद होते रहे हैं. दरअसल, भारत की सीमा चीन नहीं बल्कि तिब्बत से सटी है. इन तमाम विवादों की शुरुआत वर्ष 1950 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद ही शुरू हुई. वर्ष 1959 में तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के अरुणाचल सीमा होकर पैदल ही भारत पहुंचने के बाद सीमा को लेकर कटुता और बढ़ी. अब ताजा मामले में भूटान के साथ सीमा विवाद छेड़ना अरुणाचल के मामले पर भारत पर दबाव बनाने की चीनी रणनीति का ही हिस्सा है.

भूटान के  लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प की वजह से भले भारत-चीन सीमा विवाद सुर्खियों में रहा हो, देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाके में बीते कोई सात दशकों से इस मुद्दे पर अनबन चलती रही है. चीन सिक्किम के भारत में विलय के अवैध करार देते हुए वर्ष 2003 तक उस पर दावा करता रहा है. पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को तो वह अब भी दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है. तिब्बत से लगी लगी सिक्किम की नाथुला सीमा पर अक्सर छोटे-मोटे विवाद होते रहे हैं. दरअसल, भारत की सीमा चीन नहीं बल्कि तिब्बत से सटी है. इन तमाम विवादों की शुरुआत वर्ष 1950 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद ही शुरू हुई. वर्ष 1959 में तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के अरुणाचल सीमा होकर पैदल ही भारत पहुंचने के बाद सीमा को लेकर कटुता और बढ़ी. अब ताजा मामले में भूटान के साथ सीमा विवाद छेड़ना अरुणाचल के मामले पर भारत पर दबाव बनाने की चीनी रणनीति का ही हिस्सा है.

दरअसल चीन के साथ 1950 तक कोई विवाद था ही नहीं, इसकी वजह यह है कि पूरब में भारत की सीमा चीन से वहीं बल्कि तिब्बत से सटी है. उस समय सिक्किम के नाथुला से तिब्बत होकर दक्षिण पश्चिम चीन तक पहुंचनी वाली 543 किमी लंबे इस मार्ग को सिल्क रूट कहा जाता था. यह सड़क 19 सौ साल से भी ज्यादा समय तक इन तीनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा रही. लेकिन वर्ष 1950 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद जहां सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर विवाद शुरू हुआ, वहीं 1962 की लड़ाई के बाद देश-विदेश में मशहूर सिल्क रूट भी बंद हो गया. हालांकि बाद में वर्ष 2006 में उसे दोबारा खोला जरूर गया था. लेकिन वह अक्सर बंद ही रहता है. इस समय भी उसे बंद कर दिया गया है. कुछ साल पहले उसी सड़क से मानसरोवर यात्रा की भी शुरुआत हुई थी. 


दरअसल, तिब्बत पर कब्जे के बाद चीन की निगाहें हमेशा सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश पर रही हैं. सिक्किम के एक तिब्बती नेता लोबसांग सांग्ये कहते हैं, “चीन की निगाहें बहुत पहले से ही लद्दाख, नेपाल, भूटान, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश पर रही हैं. तिब्बत पर कब्जे के बाद माओ औऱ दूसरे चीनी नेताओं मे कहा था कि तिब्बत हथेली है. अब इसके बाद इन पांचों अंगुलियों पर कब्जा करना है.”

पूर्वी क्षेत्र में भारतीय और चीनी सेना के बीच झड़पों का भी लंबा इतिहास रहा है. सिक्किम की नाथुला सीमा चौकी पर 11 सितंबर से 15 सितंबर, 1967 के बीच हिंसक झड़प हुई थी. उसके बाद उसी साल अक्तूबर में चो ला में भी हमले हुए. 20 अक्तूबर, 1975 को अरुणाचल के तुलुंग ला में चीनी सैनिकों के हमले में चार भारतीय जवान शहीद हो गए थे. उसके बाद इस मई में भी चीनी सीमा पर हुई झड़प में 10 जवान घायल हो गए थे.


भूटान के साथ ताजा सीमा विवाद की शुरुआत बीते महीने उस समय हुई थी जब चीन ने ग्लोबल एनवायरनमेंट फेसिलिटी कौंसिल (जीईएफसी) की बैठक में भूटान के पूर्वी इलाके में स्थित साकटेंग वन्यजीव अभयारण्य परियोजना के लिए धन के आवंटन पर यह कह कर आपत्ति जताई थी कि वह विवादित क्षेत्र है. तब भूटान ने इसका कड़ा विरोध किया था. उसके बाद एक बार फिर चीन ने उस विवादित क्षेत्र पर अपना दावा किया है. भारत के लिए चिंता की बात यह है कि भूटान के पूर्वी क्षेत्र में ट्रासीगांग जिले में 650 वर्ग किमी इलाके में फैली उक्त वन्यजीव अभयारण्य की सीमा अरुणाचल प्रदेश से सटी है. चीन ने अरुणाचल को वर्ष 2014 में अपने नक्शे में दिखाया था.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन का मकसद अरुणाचल के मुद्दे पर भारत पर दबाव बढ़ाना है. इसकी वजह यह है कि पूर्वी क्षेत्र में भूटान के साथ उसका कभी कोई सीमा विवाद था ही नहीं. मध्य और पश्चिमी भूटान में चीन के साथ सीमा विवाद रहा है और दोनों देश इस मुद्दे पर वर्ष 1984 से 24 बार बैठक कर चुके हैं. लेकिन पहले कभी चीन ने उक्त अभयारण्य पर अपना दावा नहीं किया था. डोकलाम विवाद के बाद यह बैठक नहीं हुई है. वैसे, चीन इससे पहले भी वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के जरिए भारत पर दबाव बनाने का प्रयास कर चुका है. भूटान के साथ चीन के राजनयिक संबंध नहीं हैं. इसके लिए भी चीनी नेतृत्व औऱ मीडिया का एक हिस्सा भारत को ही जिम्मेदार ठहराता रहा है.भूटान के अंग्रेजी अखबार भूटानीज के संपादक तेनजिंग लामसांग कहते हैं, “चीन ने पहले कभी पूर्वी भूटान में सीमा विवाद का मुद्दा नहीं उठाया था. इससे साफ है कि वहां कभी कोई विवाद नहीं था.”

Share On Facebook
  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :