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बिहार में अब मोबाइल घोटाला

फज़ल इमाम मल्लिक 

पटना .राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे की कलई उतार दी है. यों तो नीतीश कुमार सरकार पर सृजन घोटाले से लेकर धान खरीद घोटाला और शौचालय घोटाले का आरोप लगता रहा है लेकिन मीडिया ने उन खबरों को उतनी तवज्जो नहीं दी जो अमूमन विपक्ष की खबरों को दी जाती रही है इसलिए भ्रषाटाचार के यह मामले नीतीश कुमार के ओघोषित सेंसरशिप का शिकार हो कर रह गए. ताजा घोटाला मोबाल फोन की खरीदारी को लेकर है. बिहार में मोबाइल घोटाले में सरकार को करीब सात करोड़ का चूना लगा है.

रालोसपा ने समाज कल्याण विभाग में 6.78 करोड़ के मोबाइल घोटाला का आरोप लगाते हुए नीतीश कुमार के जीरो टॉलरेंस पर सवाल उठाया है. रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर पूरे मामले की जांच करा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. कुशवाहा ने चेतावनी भी दी कि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी जन आंदोलन शुरू करेगी.

रालोसपा अध्यक्ष ने कहा कि अक्टूबर 2018 में समाज कल्याण विभाग में 33,914 स्मार्टफोन की खरीद हुई. इसके लिए बाजार की कीमत से प्रति मोबाइल दो हजार से अधिक की राशि का भुगतान हुआ. स्मार्टफोन खरीद के लिए 31 करोड़ 4 लाख 14 हजार 842 रुपए का भुगतान किया गया. उस समय इस मोबाइल की बाजार में सभी टैक्स सहित कीमत सात हजार रुपए से भी कम थी. यह मोबाइल तुलनात्मक रूप से भी कम फीचर्स और कम मेमोरी के चलते अप्रचलित हो चुकी थी. इस खरीद में बाजार मूल्य से कम से कम छह करोड़ 78 लाख 28 हजार रुपए का अधिक भुगतान किया गया. इस खरीदारी में राशि का दुरुपयोग हुआ. उपेंद्र कुशवाहा ने इसके लिए बाकायदा दस्तावेज भी जारी किए.


बिहार सरकार पर हमलावर होते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में बड़ा घोटाला होने की बात कही है. कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि नीतीश सरकार के कार्यकाल में समाज कल्याण विभाग के अंदर मोबाइल फोन घोटाला हुआ है. उपेंद्र कुशवाहा ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस की और बिहार सरकार पर आरोप लगाया है कि समाज कल्याण विभाग ने अक्टूबर 2018 में जिस स्मार्टफोन की खरीद की उसका भुगतान वास्तविक कीमत से ज्यादा किया गया. कुशवाहा ने आरोप लगाया है कि जिस स्मार्टफोन के लिए 9100 रूपए के दर से भुगतान किया गया उसकी कीमत बाजार में उस वक्त सात हजार से भी कम थी.

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि समाज कल्याण विभाग में 2018 में लगभग 33914 स्मार्टफोन की खरीदारी की गई जिसके लिए 31 करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च की गई. समाज कल्याण विभाग ने जिस स्मार्टफोन की खरीदारी की वह उस वक्त अपने फीचर्स के कारण आउटडेटेड हो चुका था. बावजूद इसके ज्यादा कीमतों पर उस स्मार्टफोन की खरीद क्यों की गई, सवाल यह है और इससे साफ है कि यह किसी घोटाले की तरफ इशारा करता है. कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. हालांकि सरकार की तरफ से अभी इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन नीतीश कुमार के भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस पर सवाल तो उठता ही है.  

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