चैनल को समाज तोड़ने की आजादी नहीं मिल सकती

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चैनल को समाज तोड़ने की आजादी नहीं मिल सकती


फज़ल इमाम मल्लिक
दिल्ली. चैनलों की भूमिका पिछले कुछ सालों में लगातार सवालों में रही है. देश और समाज को भड़काने के एजंडे पर चैनल काम कर रहे हैं. सरकार उन चैनलों के पीछे खड़ी है. चैनलों पर निगरानी वाली संस्था एनबीए की कोई विश्वसनीयता नहीं रही है. चैनलों पर हिंदू-मुसलमान जैसे विषयों पर डिबेट के बहाने समाज को बांटने की लगातार कोशिश हो रही है. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने चैनलों की भूमिका पर न सिर्फ यह कि सवाल खड़ा किया बल्कि लताड़ा भी. अदालत का मानना था कि चैनल नफरत फैलाने में लगे हैं. जनादेश लाइव पर इसी मुद्दे पर चर्चा हुई. पत्रकार हरजिंदर के संचालन में हुई इस चर्चा में हिस्सा लिया सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन, वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी, सैबाल, वीरेंद्रनाथ भट्ट और जनादेश के संपादक अम्बरीश कुमार ने. हरजिंदर ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की जानकारी देते हुए कहा कि सुदर्शन चैनल अपने कार्यक्रम में यूपीएससी विवाद की बात कर रहा था और कहा जा रहा था कि किसी विशेष कारणों से मुसलमानों की तादाद लगातर बढ़ रही है. अदालत ने इसे खतरनाक बताया और फिलहाल पाबंदी लगा दी है और कहा कि समाज में यह नफरत फैलाने वाला है.

ताहिरा हसन ने चर्चा की शुरुआत करते इस आदेश को स्वागतयोग्य बताया और कहा कि जस्टिस जोसफ ने भी कहा कि आजादी का मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी बोलें और दिखाएं. दरअसल यह सिर्फ एक समुदाय की बात नहीं है क्योंकि जिस तरह से उन्होंने कहा यूपीएससी जिहाद, यह अपने आप में घटिया तरीके से ऐंकर ने शुरू किया उसने सवाल खड़ा कर दिया यूपीएससी पर, संस्था पर ही सवाल खड़ा किया. जिस यूपीएससी से मेहनत कर परीक्षाएं देकर युवा सामने आते हैं तो उस चैनल तो पूरी संस्था और सिस्टम को ही सवालों में खड़ा कर डाला है और चिंता की बात यह है. ताहिरा हसन ने यह सवाल भी उठाया कि मामला अदालत में गया यह तो ठीक है लेकिन हमारे यहां कानून की धाराएं हैं जहां लोगों को बांटने और नफरत फैलाने के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. हमारा लोकतंत्र संविधान से चलता है और संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है. इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि चैनल ने हमारे संविधान और लोकतंत्र पर हमला किया है. कार्रवाई नहीं होगी तो यह चलन और बढ़ेगा. ऐंकरों की मनमानी बढ़ेगी, इसे हम देख भी रहे हैं आपकी आवाज को चैनलों पर दबाने की कोशिश की जाती है. आप अगर चैनल के हिसाब से नहीं बोलते तो आपकी आवाज को म्यूट कर दिया जाता है.

रामदत्त त्रिपाठी ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ताहिरा जी को ऐसा लगता है कि देश संविधान से चल रहा है तो उन्हें जो भरोसा है देश चलाने वालों पर वह काबिले-तारीफ है. उन्हें लगता है कि जंगलराज नहीं आया है तो वे आशावादी हैं. लेकिन ऐंकर कुछ नहीं होता है. वह तो मोहरा होता है. सारा फैसला मालिकान या संपादक लेता है. प्रोमो आया तो हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार अगर इजाजत देती है तो इसका प्रसारण हो सकता है. तो केंद्र सरकार ने इसके प्रसारण की इजाजत दी है. अदालत में बहस के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता बहुत हायतौबा मचा रहे थे कि अगर मीडिया पर पाबंदी लगा दी जाएगी तो लोकतंत्र नष्ट हो जाएगा. वे अदालत में लोकतंत्र की दुहाई दे रहे थे सुदर्शन टीवी के पक्ष में. समझने की बात यह है कि यह कार्यक्रम किसके संरक्षण में संचालित हो रहे हैं और डोर किसके हाथ में है यह जानना जरूरी है. एक एजंडा है कि किसी न किसी रूप में मुसलिम समुदाय को विलेन बना कर समाज को बांटे रहिए और खास कर हिंदुओं में भय पैदा किया जा रहा है कि तुम्हारी आबादी कम हो जाएगी, प्रशासन में तुम्हारी हिस्सेदारी कम हो जाएगी. यह एक सुनियोजित एजंडे के तहत चलाया जा रहा है. केंद्र सरकार की सहमति और अनुमति से हो रहा है.

सैबाल ने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण विषय है क्योंकि ऐसा लग रहा है कि टीवी चैनल और ऐंकर देश को चला रहे हैं. आम लोगों की धारणा यह है कि ऐंकर बहुत बहादुर होते हैं. यह पूरी जो संस्कृति पनपी है इसका असर नई पीढ़ी पर भी पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा होती है तो इसका प्रभाव पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट की आजकी टिप्पणी महत्त्वपूर्ण है. यह बहुत हद तक निर्णायक होगा. चैनलों का असर कितना है इससे समझा जा सकता है कि विमान में जो हुआ उसकी आलोचना हो रही है लेकिन कार्रवाई नहीं. इतनी हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा है कि उन पर कार्रवाई करे. उनके चहरे दिखाई दे रहे हैं तो उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई हो लेकिन नहीं लिए जा रहे हैं. जबकि हर तरह के कानून की धज्जियां उड़ाई गईं.

वीरेंद्रनाथ भट्ट ने हस्तक्षेप करते हुए अदालती आदेश के साथ-साथ ज़कात फाउंडेशन की चर्चा करते हुए बातचीत को दूसरी तरफ ले जाने की कोशिश की. लेकिन हरजिंदर ने साफ किया कि आजकी चर्चा ज़कात फाउंडेशन पर नहीं हो रही है. वीरेंद्र भट्ट ने ज़कात फाउंडेशन की चर्चा करते हुए शाहीन बाग और रोहंगिया मुसलमानों तक बात को ले गए. उन्होंने यूपीएससी से निकले युवाओं के आइडोलोडिकल पृष्ठभूमि की चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि जो मुसलिम इससे पास होकर आए वे किसी रेडिकल विचारधारा के हैं तो वह देश के लिए ही नहीं मुसलमानों के लिए भी समस्या बनेंगे. मुसलिम उम्मीदवार कितने आ रहे हैं कितने नहीं आ रहे हैं, यह सवाल नहीं है क्योंकि वे अपनी काबलियत के बूते आ रहे हैं, प्रतियोगिता पास कर आ रहे हैं इसलिए उस पर सवाल नहीं उठाना चाहिए. लेकिन क्या वे रेडिकल माइंडसेट के हैं क्योंकि यह याद रखना चाहिए कि जकात फाउंडेशन के रिश्ते तुर्की के राष्ट्रपति से भी सामने आए हैं, पाकिस्तान के साथ भी रिश्ते हैं उसके. इन तथ्यों को भी सामने आना चाहिए और जकात फाउंडेशन को भी अपने बारे में बताना चाहिए.

अम्बरीश कुमार ने कहा कि दो बातों पर ध्यान दिलाना चाहता हूं. पहली यह कि भाषा की सीमा को लेकर, हमलोग अखबार से निकले हैं. अखबारों में इस बात का बहुत ध्यान रखा जाता था कि कैसी भाषा हो ताकि किसी को तकलीफ न पहुंचे. लेकिन चैनलों की भाषा जो हाल में आई है वह हर सीमा को तोड़ते चले जा रहे हैं. किसी का नाम लेने की जरूरत नहीं है लेकिन सांप्रदायिक मामलों को लेकर कुछ चैनलों ने अति कर दी है. यह साफ दिख रहा है. अभी भट्टजी ने जो कहा ज़कात फाउंडेशन को लेकर तो इसका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है. लेकिन मेरा कहना है कि आरएसएस, कांग्रेस या वाम की विचारधारा को देखर कर चयन होगा. विचारधारा के आधार पर तो चयन होता नहीं है. कौन किससे जुड़ा है बायोडाटा देख कर तो नहीं करते. यह कैसे तय करेंगे कि विवेकानंद फाउंडेशन वालों को छूट देंगे और ज़कात फाउंडेशन वालों पर पाबंदी लगा देंगे. इसका कोई मतलब नहीं है. प्रतियोगिता में लोग हिस्सा लेते हैं और पास कर आते हैं. हमारे यहां सियासी तौर पर किसी भी विचारधारा का व्यक्ति परीक्षा देकर आकर आ सकता है. मुद्दा यह है कि चैनलों का नियंत्रण से बाहर जाना. सुदर्शन चैनल ने जो किया उसने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को तोड़ने की कोशिश की है और सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है. अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को समाज तोड़ने की आजादी नहीं दी जा सकती है. चर्चा में यह बात भी सामने आई कि सरकार ने सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम को प्रसारण की इजाजत दी, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

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