जनादेश

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जो कहिए सरकार ,सब छपेगा !

संजय कुमार सिंह

आर्थिक मंदी और कश्मीर में की गई सरकारी कार्रवाई से मचे हंगामे से निपटने के लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अगले दो-तीन महीने में राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में 50 हजार नौकरियां दी जाएंगी. इसी तरह, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि देश में 75 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. इससे 15,700 नई सीटें बनेंगी. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार 2019 में देश के 529 मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 70,978 सीटें हैं. इनमें 269 कॉलेज सरकारी हैं और इनमें 35688 सीटें हैं जबकि 260 प्राइवेट कॉलेज में 35290 सीटें हैं.  

इस खबर के अनुसार देश में सबसे ज्यादा, 2750 मेडिकल सीटों की वृद्धि 25 नए कॉलेजों में 2019-20 के दौरान होगी और देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा फैकल्टी की रही है. इस शिक्षा सत्र में 25 नए कॉलेज के साथ 10 नए निजी कॉलेज भी खुलेंगे और 3000 से ज्यादा फैकल्टी की आवश्यकता होगी. अभी ही मेडिकल कॉलेज फैकल्टी के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो 75 नए कॉलेज 2022 तक फैकल्टी कहां से लाएंगे और फैकल्टी के बिना कॉलेज तो खुल जाएंगे पढ़ाएगा कौन? जैसे-तैसे व्यवस्था कर भी ली जाए तो गुणवत्ता? 

सरकार अगर अचानक 75 मेडिकल कॉलेज खोलने की बात करे तो यह सवाल उठेगा कि ये कॉलेज कैसे और कहां खुलेंगे. पर खबर स्पष्ट नहीं है. दैनिक जागरण ने इस खबर को भले छह कॉलम में लीड बनाया है पर लिखा है, 75 नए मेडिकल कॉलेज ऐसे जिलों में खोलने को मंजूरी दी गई है, जहां ऐसी सुविधाएं नहीं हैं. इसका मतलब यह भी है कि अभी जिलों के नाम तय नहीं हैं. पर अखबार ने लिखा है, "इस कदम से आधारभूत चिकित्सा सेवाएं आम जनों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी." 

आगे खबर है, "मंत्रिमंडल के समक्ष रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक, सभी मेडिकल कॉलेज ऐसे स्थानों पर खोले जाएंगे जहां पहले से कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है और जो जिले विकास में पिछड़ गए हैं. ऐसा नहीं है कि विकास में पिछड़े जिले वही हैं जहां मेडिकल कॉलेज नहीं हैं और जहां मेडिकल कॉलेज हैं वो जिले पिछड़े हुए नहीं हैं. खबर यह भी कहती है कि इन मेडिकल कॉलेजों को मौजूदा जिला या रेफरल अस्पतालों में स्थापित किया जाएगा. मतलब अभी यह तय नहीं है. पर यह तय है कि इस प्रस्ताव को अमल में लाने में 24,375 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इन कॉलेजों की स्थापना 2021-22 तक हो जाएगी.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस मामले पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षो में पोस्ट ग्रेजुएट और एमबीबीएस की 45 हजार सीटें जोड़ी गईं और इस अवधि में 82 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई थी. जावडेकर ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों के बनने से लाखों गरीबों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों को लाभ होगा. इससे ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी. कॉलेज 2022 तक बनेंगे, एमबीबीएस का कोर्स पांच साल का होगा तो 2027 में यह उपलब्धता बढ़ेगी पर खबर आज ही. 


इसी तरह, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अगले दो-तीन माह के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में 50 हजार नौकरियां दी जाएंगी. यह साधारण नहीं है. देश का कोई एक राज्य दो तीन महीने में 50 हजार नौकरियां दे यानी उसके लिए विज्ञापन निकले, आवेदन स्वीकार किए जाएं, परीक्षा हो, नतीजे आएं और योग्य उम्मीदवार, वह भी 50 हजार छांट लिए जाए यह साधारण नहीं है. देश भर में राज्यों की नौकरियों के लिए परीक्षा का जो हाल है और लोगों के जो अनुभव हैं उससे इसपर यकीन करना मुश्किल है. राज्यपाल ने कहा है तो निश्चित रूप से यह खबर है पर इस खबर के साथ यह बताया जाना चाहिए था कि देश में ऐसा पहले कभी किसी राज्य में हुआ है कि नहीं और हुआ है तो कब किस राज्य में किसी खास मौके पर या वैसे ही. आमतौर पर अखबारों में ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली और एक पाठक के रूप में आपके पास इनपर यकीन नहीं करने का कोई कारण नहीं है. 

वह भी तब जब कैरियर्स 360 डॉट कॉम ने अतारांकित प्रश्न संख्या 4650 के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लोकसभा में 23 मार्च 2018 को दिए गए जवाब के हवाले से लिखा है कि देश भर में 216 मेडिकल कॉलेज हैं और इनमें 30455 सीटें हैं. इस तरह देश में अगर आजादी के बाद 70 साल में 30 हजार (सरकारी) सीटें हैं तो 2019 में घोषणा और 2022 में अगर 15700 मेडिकल सीटें बढ़ जाती हैं तो बड़ी बात होगी. अभी (2018 की सूचना के अनुसार) अगर 216 कॉलेज में 30 हजार सीट हैं तो सिर्फ 75 कॉलेज में 15700 सीटें बढ़ जाना भी साधारण नहीं है जबकि अभी यह तय नहीं है कि ये कॉोलेज कहां यानी किन जिलों में खुलेंगे और किन अस्पतालों से संबद्ध होंगे.  

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