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कश्मीर की जेल में कितने बच्चे कैद ?

बेतवा शर्मा

श्रीनगर .कश्मीर घाटी में बच्चों की गिरफ्तारी को लेकर आम लोगों में चिंता बढ़ रही है .मीडिया रपट के मुताबिक कश्मीर में अगस्त से लेकर अबतक पांच हजार से ज्यादा बच्चों को जेल भेजा जा चुका है .   जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर खत्म करने के चार दिन बाद बीते नौ अगस्त को कश्मीर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता और जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नाजिर अहमद रोंगा को उनके घर श्रीनगर से पुलिस बल  ने उठा लिया. एक हफ्ते बीतने के बाद उनका परिवार यह जान सका कि उन्हें श्रीनगर के केन्द्रीय कारागार में डाला गया है. बाद में उनकी गिरफ्तारी और फिर जेल भेजे जाने की जो वजह बताई गई वह हैरान करने वाली थी .  रोंगा ने अपने वकील बेटे के एक मुवक्किल को  प्रतिबंधित करने की खबर लीक दी थी. इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा .पर मामला यहीं तक नहीं थमा .रोंगा को अगली बार उत्तर-प्रदेश के अंबेडकर नगर के जिला जेल में पहुंचा दिया गया.


रोंगा के पुत्र उमेर नाजिर रोंगा कहते हैं कि क्या कल्पना की जा सकती है कि आम आदमी के साथ क्या हो रहा होगा. हजारों राजनैतिक, अलगाववादी, वकील , युवा और छोटे बच्चों को अनुच्छेद तीन सौ सत्तर  हटाये जाने के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह संख्या चार हजार से तेरह हजार के बीच हो सकती है. सीनियर अधिवक्ता और जम्मू और कश्मीर अधिवक्ता संघ के सदस्य मंजूर अहमद ने बताया कि पांच अगस्त से करीब तीन सौ बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिकाएं परिवार के सदस्यों द्वारा दी जा चुकी हैं. जबकि दूसरी ओर इंडियन  एक्सप्रेस के अनुसार जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट की दो बेंच श्रीनगर और जम्मू में सत्रह न्यायाधीश होने चाहिये जबकि बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिकाओं को सुनने के लिये महज नौ जज हैं जिनमें श्रीनगर में सिर्फ दो.

वकील का संगठन बार-बार कह रहा हैं कि  कश्मीर में शासन प्रशासन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहा हैं लेकिन कौन उनकी बात सुनने वाला है .पुलिस प्रशासन तो सीधे पकड़ो और जेल में डालो पर की नीति पर चल रहा है 

वकील  अहमद ने बताया कि पांच अगस्त से बंदी प्रत्यक्षीकरण की किसी भी याचिका में जवाब नहीं जारी किया गया है. स्थिति नरक जैसी हो चुकी है. रोंगा के अंबेडकर नगर जिला कारागार में डाले जाने के बाद बार के मौजूदा अध्यक्ष मियां अब्दुल कयूम को पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत जेल भेजा जा चुका है और वह इस समय आगरा के केंद्रीय कारागार में हैं जबकि जम्मू और कश्मीर में पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के अनुसार यह अधिकार है कि अपराध करने के बाद ही एक व्यक्ति को बिना ट्रायल के साथ एक साल तक रखा जा सकता है.  (फोटो और स्हटोरी फपोस्ट इंडिया से साभार ) 

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