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गठिया से घबराने की जरूरत नहीं-डा कुशवाहा

लखनऊ .गठिया यानी आर्थराइटिस के रोग को लोग अक्सर मामूली बीमारी समझकर नजर अंदाज कर देते हैं जबकि यह बीमारी मरीज की कार्य क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है. पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी और जोड़ों के दर्द के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. यहां तक कि समय पर इलाज न कराने पर प्रत्यारोपण ही एकमात्र उपाय बचता है.

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के अस्थि-शल्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र सिंह कुशवाहा कहते हैं, ‘गठिया कई प्रकार की होती है, जिसमें ऑस्टियोआर्थराइटिस प्रमुख है. यह ज्यादा उम्र के लोगों को होता है. इसके अन्य प्रकारों में रुमैट्रवाइड आर्थराइटिस, आर्थराइटिस सोरियाटिक और रिएक्टिव आर्थराइटिस आदि प्रमुख हैं.‘डॉ. कुशवाहा कहते हैं कि इसके लिए बढ़ता वजन, बदलता खानपान और दिनचर्या में लापरवाही आदि प्रमुख वजह हैं.

कैसे करें बचाव

गठिया से बचाव के लिए वजन कम करने के साथ-साथ नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या का होना अहम है. पैदल चलना और दौडऩा भी इस बीमारी को दूर रखने का कारगर तरीका है.

डॉ. कुशवाहा कहते हैं कि उनके पास अधिकतर मरीज अंतिम अवस्था में आते हैं जिनका प्रत्यारोपण करना पड़ता है हालांकि प्रत्यारोपण के बाद वे पुरानी दिनचर्या के अनुकूल हो जाते हैं. डॉ. कुशवाहा अपने एक मरीज पुरेंद्र कुमार का उदाहरण देते हैं. कन्नौज निवासी 55 वर्षीय पुरेंद्र गठिया से इतने परेशान थे कि हमेशा बिस्तर पर ही रहते थे. वह करवट तक लेने में नाकाम थे. डॉ. कुशवाहा द्वारा दोनों कूल्हों और घुटनों का ऑपरेशन करने के बाद वे एकदम सामान्य जीवन ही रहे हैं.गठिया के बारे में जागरूकता इस बीमारी से बचाव में अहम भूमिका निभाती है. लेकिन यह बीमारी हो भी जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं है. कुशल चिकित्सक आसानी से इसका इलाज कर सकते हैं.


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