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राजस्थान में गहलोत और पायलट फिर आमने सामने

विनोद पाठक

जयपुर. राजस्थान में जनता और सरकार के बीच सेतु बनाने का पहला प्रयास लड़खड़ा गया है. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आदेश में जयपुर में कांग्रेस मुख्यालय पर जनसुनवाई शुरू की गई थी. तय हुआ था कि सप्ताह में पांच दिन मंत्री मुख्यालय आएंगे और जनता की समस्याओं का निपटारा करेंगे. 7 अक्टूबर को मुट्ठीभर मंत्री जनसुनवाई के लिए पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद से जनता तो मुख्यालय पहुंच रही है, पर मंत्री गायब हैं. जनता का कहना है कि हम दूर-दराज इलाकों से किराया खर्च कर आ रहे हैं और यहां आकर हमें निराशा ही हाथ लग रही है.

राजस्थान में अपने गठन के साथ ही अशोक गहलोत सरकार अंदरुनी राजनीति का शिकार हो गई थी. सरकार में गहलोत कैंप और सचिन पायलट कैंप साफ नजर आते हैं. सचिन पायलट के पास संगठन का जिम्मा भी है. वो सरकार में उप मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. जनसुनवाई को लेकर सरकार और संगठन में तालमेल की कमी इसका ताजा उदाहरण है. गहलोत और पायलट के बीच की राजनीतिक रस्साकसी का ही नतीजा था कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में ताजपोशी को पूरी तरह राजनीतिक ड्रामा बना दिया गया. कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि पार्टी के दिग्गज जाट नेता रामेश्वर डूडी को अंदरखाने पायलट का आशीर्वाद मिला हुआ था, जिस कारण वो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सीधी टक्कर ले रहे थे. भले वैभव ने चुनाव जीत लिया हो, लेकिन जिस तरह से मुख्यमंत्री की फजीहत हुई और उन्हें यहां तक सफाई देनी पड़ी कि उनका पुत्र तो किराए के मकान में अलग रहता है, इससे पार्टी की फूट जगजाहिर हो गई.

वैसे राज्य में इनदिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. अपराध दर अपराध होने से विपक्षी भाजपा आक्रमक है. कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा के विधायक से लेकर सांसद तक धरने पर बैठ चुके हैं. केंद्र में जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट किया था कि क्या पुलिस और अराजकता में कोई फर्क नहीं रह गया है? माननीय अशोक गहलोत जी प्रदेश के संचालन में आपका योगदान नदारद है. दरअसल, गृह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही है. टोंक जिले के मालपुरा में विजयदशमी पर शोभायात्रा पर एक वर्ग विशेष के पथराव और क्षेत्र में कर्फ्यू के बाद विपक्ष को एक और मौका मिल गया है. कुछ दिन पहले राजधानी जयपुर में भी सामाजिक सौहार्द्र कई बार बिगड़ा था और विपक्ष ने सीधा मुख्यमंत्री पर हमला बोला था.

कमाल की बात यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आदेश को भी हल्के में लिया जा रहा है. बिना किसी खास तैयारी के शुरू जनसुनवाई का नतीजा यह है कि अब तक यह ही तय नहीं हो पाया है कि मंत्रियों की जनसुनवाई का रोस्टर क्या होगा? कौन मंत्री कब आएगा? प्रदेश कांग्रेस के संगठन महासचिव महेश शर्मा कह रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और सह प्रभारी विवेक बंसल मिलकर मंत्रियों के लिए रोस्टर तय करेंगे. उसके बाद नियमित जनसुनवाई होगी. यूं ही कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति चलती रही तो जनता केवल आंसू बहाएगी और उसकी सुनवाई कही नहीं होगी.

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