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राजे रजवाड़ों से मुक्त होती यूपी कांग्रेस

यशोदा श्रीवास्तव

लखनऊ .प्रतापगढ़ से तीन बार सांसद रहीं राजकुमारी रत्ना सिंह का कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाना,कांग्रेस को बड़ा झटका, नाम से खबर की सुर्खियां बन गई. यूपी के सारे अखबारां ने कमोवेश इसी र्शीषक से खबर बनाई. निसंदेह रत्ना सिंह का कांग्रेस छोड़ना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि वे उस पार्टी का हिस्सा बनीं जिसका ताउम्र उनके पिता स्व राजा दिनेश सिंह मुखालफत करते रहे. राजा दिनेश सिंह पूर्व विदेश मंत्री रहे हैं. वे इंदिरा गांधी के विश्वास पात्र टीम के सदस्यों में से एक थे. रत्ना सिंह अपने पुत्र भुमन्यु और मदन सिंह के साथ भजपा की सदस्यता ग्रहण की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें प्रतापगढ़ जिले के गड़वारा में एक जनसभा के दौरान पार्टी की सदस्यता दिलाई. कांग्रेस विरोधी राजनीतिक गलियारो में चर्चा तेज है कि योगी कांग्रेस को ठाकुर मुक्त करने की अपनी रणनीति के तहत रत्ना सिंह को भाजपा ज्वाइन करवाई.

रत्ना सिंह के पहले अमेठी राजघराने के ही राजा संजय सिंह ने पत्नी समेत कांग्रेस छोड़ दी. वे भी भाजपा में शामिल हो गए. रायबरेली की विधायक आदिती सिंह के भाजपा में जाने की चर्चा जोर पकड़ रही है लेकिन शायद अभी उनके माफिक माहौल नहीं बन पा रहा इसलिए वे ठहरी हुई हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का सानिध्य पाकर यू ंतो कांग्रेस के कई ठाकुर नेता भाजपा में जा चुके हैं लेकिन ,कांग्रेस को झटका, जैसी खबर एक राजा और एक राजकुमारी के कांग्रेस छोड़ने पर ही बनी.

तो क्या सचमुच यूपी के दो राजघरानों के पुराने कांग्रेसियों को पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को झटका लगा है? यह सवाल दरअसल इसलिए वाजिब है कि कांग्रेस हाई कमान ने हाल ही यूपी यूपी कांग्रेस कमेटी का गठन किया है जिसकी कमान पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय कुमार लल्लू को सौंपी गई है. नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बनिया बिरादरी से आते है. अध्यक्ष पद ग्रहण करने के फौरन बाद उन्होंने अभी 51 जिलों के संगठन में फेर बदल किया है. इस फेर बदल से साफ है कि कांग्रेस का जोर अब बैकवर्ड, दलित,मुस्लिम और ब्राम्हण पर है. जिन जिलों में नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है वहां जातिय समीकरण का पूरा ख्याल रखा गया है. ठाकुरों को भी साधने की कोशिश की गई लेकिन राजा रजवाड़े घरानों वाले ठाकुरों को दूर रखा गया. बनिया बिरादरी जब आंख मूदकर भाजपा को वोट दे रहा था तब अजय कुमार लल्लू यूपी बिहार बार्डर के विधानसभा क्षेत्र तमकुहीराज से कांग्रेस के टिकट पर दो बार से विधायक चुने गए. यह विधानसभा क्षेत्र कुशीनगर जिले का हिस्सा है.

अब रत्ना सिंह हों या संजय सिंह को कांग्रेस छोड़ने की खबर ,कांग्रेस को झटका, और नए प्रदेश अध्यक्ष द्वारा किए जा रहे संगठन के काया कल्प पर गौर करें तो खबर बनती है कि ,राजा रजवाड़ों से मुक्ति की राह पर कांग्रेस,. यह सच है कि कांग्रेस अब ऐसे नेताओं से मुक्ति पा लेना चाह रही है जो र्सिफ स्वार्थवश कांग्रेस में रहकर केवल सत्ता की मलाई काटने की चाह रखते हों. वे चाहें राजा संजय सिंह हों या रत्ना सिंह. इन बड़ राजघरानों के पहले भी नामचीन ठाकुर नेता कांग्रस से रूखसत हुए हैं जिनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदंबिका पाल का नाम लिया जा सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री स्व वीरबहादुर सिंह के पुत्र फतेह बहादुर सिंह पिता के निधन के बाद ही कांग्रेस छोड़ दिए थे. लेकिन इससे कांग्रेस पर कोई फर्क नहीं पड़ा. कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की टीम के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी कहते हैं कि दरअसल राजे रजवाड़े घरानों के लोग ही कांग्रेस से फायदा उठाए और आज जब संर्धष जैसी परीक्षा की घड़ी आई तो भाग खड़़े हूए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब जमीन से जुड़े कार्यर्ताओं को तवज्जो दे रही है. पार्टी ने पूर्वांचल के ही स्व हर्षवर्धन की तेजतर्रार बेटी सुप्रिया सिंह को राष्टीय प्रवक्ता नियुक्ति किया है. स्व हर्षवधर्न जमीन से जुड़े हुए नेता थे. वे एक बार विधायक तथा दो बार सांसद रहे हैं. उनके बाबा सामंतवादी प्रथा के विरोध स्वरूप स्वंय खेतों में हल तक चलाया. उन्होंने कहा कि दरअसल आज की कांग्रेस राहुल गांधी की कांग्रेस है जहां सिर्फ संर्घषशील और जमीनी नेताओं और कार्यतकर्ताओं के लिए ही जगह है.फोटो साभार पंजाब केसरी 

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