जनादेश

ढोरपाटन का वह शिकारगाह ! इस मौसम में भिंडी ,अरबी और कटहल से बचें ! किसान संगठनों ने किया ग्रामीण भारत बंद का एलान जमानत नियम है, जेल अपवाद फिर सौ दिन ? हनीट्रैप का खुलासा करने वाला अखबार निशाने पर कौन हैं ये राहुल बजाज ,जानते हैं ? पानी किसी एक देश का नहीं होता अदरक डालिए साग में अगर कफ से बचना है तो जंगल ,पहाड़ और शिकार ! चलो सोनपुर का मेला तो देखें ! फिर दिखी हिंदी मीडिया की दरिद्रता ! मोदी को ठेंगा दिखाती प्रज्ञा ठाकुर ! गुर्जर-मीणा विवाद में फंसा पांचना बांध तो जेडीयू ने भी दिखाई आंख ! महाराष्ट्र छोड़िए अब बंगाल और बिहार देखिए ! सांभर झील बनी मौत की झील जो आपसे कहीं सुसंस्कृत है! भाजपा और तृणमूल दोनों का रास्ता आसान नहीं कश्मीरी नेताओं का यह कैसा उत्पीडन ! शुक्रिया ,पोगापंथ से लड़ने वाले नौजवानों !

फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले)

लखनऊ. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की राज्य इकाई ने कहा है कि यह महत्वेपूर्ण है कि अयोध्या  में विवादित स्थ्ल पर सर्वोच्चस न्याायालय का फैसला किसी भी तरह से 6 दिसम्बजर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस की कायरतापूर्ण और आपराधिक घटना को सही नहीं ठहराता है, लेकिन यह निर्णय विवाद का यथार्थपरक समाधान करने में भी असफल रहा है - स्वंय अदालत ने  बताया गया आधार और निकाले गये निष्कर्ष के बीच की असंगति इसे अस्पष्ट और यथार्थ से दूर कर रही है.


पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि सर्वोच्च  न्यापयालय ने बिल्कुल ठीक कहा है कि बाबरी मस्जिद ध्वंस की कार्यवाही कानून के राज का स्पष्ट उल्लंघन था, ऐसे में इस विवाद में भूमि के मालिकाने का फैसला भी तथ्यों  व सबूतों के आधार पर होना चाहिए था, धार्मिक भावनाओं के आधार पर नहीं. लेकिन पूरी विवादित भूमि केन्द्र  के माध्यिम से मन्दिर बनाने के लिए देने और गिरा दी गई मस्जिद के एवज में नई मस्जिद बनाने हेतु 5 एकड़ भूमि किसी अन्य  स्थाीन पर देने का फैसला सर्वोच्चत न्या्यालय की खुद की राय के साथ ही न्याय नहीं कर रहा है. न्याकयालय की बैंच द्वारा सर्वसम्म्ति से दिये गये फैसले में निहित असंगति इसी फैसले के परिशिष्ट  में दिये इस तथ्य  में भी जाहिर हो रही है जिसमें बताया गया है कि पांच न्यायाधीशों में से एक की राय भिन्न थी, जिनका हिंदू मान्यताओं  के अनुरूप मानना है कि विवादित स्थाल ही राम की जन्म स्थली है. हालांकि इसी निर्णय में इस बात को भी जोर देकर कहा गया है कि मामले पर फैसला तथ्योंके आधार पर होना चाहिए, धार्मिक मान्य ताओं के आधार पर बिल्कुाल नहीं.


माले नेता ने कहा कि पूरी भूमि को मन्दिर निर्माण के लिए देकर और सुन्नीर वक्फ बोर्ड को मस्जिद कहीं और बनाने की सलाह दे सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय के सिद्धांतों  के ऊपर धार्मिक भावनाओं को ही प्राथमिकता देने वाला उदाहरण प्रस्तुत किया है, इससे भविष्य  में अन्यम स्मारकों– जिन्हें आरएसएस मन्दिर पर बना बताता रहता है, जिनमें ताजमहल भी शामिल है , के विरुद्ध साम्प्ररदायिक अभियानों को बढ़ावा मिलने का खतरा बढ़ेगा.उन्होंने कहा कि इसलिए हमारी मांग है कि मस्जिद गिराने के दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा सुनायी जाये. सर्वोच्चि न्यायालय और चुनाव आयोग इस बात की भी गारंटी करें कि इस फैसले का झारखंड चुनावों में जहां नामांकन प्रक्रिया चल रही है, राजनीतिक चारा के रूप में इस्तेामाल नहीं होगा और चुनावी आचार संहिता का पालन होगा.


उन्होंने प्रदेश समेत देश की शांति व न्याय पसंद जनता से किसी भी सूरत में सामाजिक सद्भाव को बिगड़ने नहीं देने और अयोध्याय में राम मन्दिर के निर्माण के नाम पर 90 के दशक में देश में हुए साम्प्र दायिक खूनखराबे की पुनरावृत्ति हरगिज नहीं देने की गारंटी करने की अपील की. उन्होंने उम्मीद जतायी कि लोकतंत्र और न्याहय की ताकतें हर हाल में मन्दिर के नाम में संघ ब्रिगेड को उन्माद भड़का कर अल्पनसंख्ययक समुदायों को और आतंकित करने और उनके नागरिक अधिकार छीनने एवं आम लोगों की आजीविका, रोजगार और मूलभूत अधिकारों के जरूरी सवालों को पीछे धकेलने की साजिश में कामयाब नहीं होने देंगी. कहा कि स्वतंत्रता , बराबरी, भाईचारा और न्यागय हमारे लोकतांत्रिक गणराज्यि के चार महत्वलपूर्ण संवैधानिक स्तंतभ हैं और इस अदालती फैसले के बहाने हमारे गणराज्यो की इस संवैधानिक नींव को ध्ववस्तं करने के संघ-भाजपा ब्रिगेड के मंसूबों को पूरा नहीं होने दिया जायेगा.



Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :