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एनआरसी के खिलाफ वाम दलों का बिहार बंद

डा लीना

पटना. सीएए और एनआरसी को वापस लेने की केंद्रीय मांग के साथ वाम दलों का राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद के तहत 19 दिसंबर को बिहार बंद रहा. राज्य के विभिन्न केंद्रों पर रेल व सड़क यातायात प्रभावित रहा और ज्यादातर स्कूल-कालेज बंद रहे. ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरें और मोदी-अमित शाह की तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद किया.

वाम नेताओं ने दावा किया कि बिहार बंद के तहत राजधानी पटना सहित राज्य के सुदूर इलाकों में बदं का व्यापक असर देखा गया. इससे साफ जाहिर होता है कि देश की आम जनता मोदी-अमित शाह के इस फरमान को मानने के लिए तैयार नहीं है. आने वाले दिनों में हम और जोरदार तरीके से लड़ाई संगठित करेंगे ताकि इस फासीवादी सरकार को सबक सिखाया जा सके. आज का दिन साझी शहादत-साझी विरातस की परंपरा को बुलंद करने का दिन है. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां, रोशन सिंह जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को हम धूमिल नहीं होने देंगे. आज पूरे देश में संविधान व लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई छिड़ चुकी है. भाजपा व मोदी सरकार को झुकना ही होगा. वाम नेताओं ने यह भी कहा कि 8 जनवरी को देश भर में मजदूर संगठनों की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल होने वाली है. हम उस हड़ताल का पूरी तरह से समर्थन करते हैं और इसमें भी सीएए व एनआसी के मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा.


सीएए और एनआरसी को वापस लेने की केंद्रीय मांग के साथ वाम दलों के राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद के तहत बिहार बंद का पटना में व्यापक असर देखा गया. जहां एक ओर वाम दलों ने दिन के 12 बजे गांधी मैदान से विशाल जुलूस निकाला, वहीं छात्र संगठनों ने पटना विश्वविद्यालय के इलाके में बंद को पूर्णरूपेण सफल करवाया. वाम संगठनो के नेताओं के नेतृत्व में बंद का जुलूस रामगुलाम चैक से निकला और जेपी गोलबंर, रेडियो स्टेशन होते हुए डाकबंगला चैराहा पहुंचा. डाकबंगला चैराहा को प्रदर्शनकारियों ने चारों तरफ से घेर लिया और घंटो नारेबाजी करते रहे. सीएए व एनआरसी को वापस लेने, संविधान-लोकतंत्र की हत्या बंद करने, महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी करने आदि नारे बुलंद करते रहे. नारेबाजी के उपरांत वहां पर एक प्रतिवाद सभा आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता सीपीएम के गणेश शंकर सिंह ने की. यहीं पर भाकपा नेता कन्हैया कुमार, जनअधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव, कांग्रेस के विधायक शकील अहमद सहित अन्य धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक पार्टियों के नेता-कार्यकर्ता भी बंद में शामिल हुए. वाम पार्टियों के नेताओं के अलावा अन्य दलों के वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए एनआरसी व सीएए को अविलंब वापस लेने की मांग की.


बिहार बंद वाम दलों के राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध दिवस के तहत किया गया था, जिसको विभिन्न राजनीतिक पार्टियों-संगठनों ने समर्थन दिया था. आइसा, एआईएसफ, एसफआई, भीम आर्मी आदि छात्र संगठनों के नेतृत्व में सैंकड़ों छात्र बिहार बंद में शामिल हुए.

डाकबंगला चौराहे पर प्रतिवाद सभा के अंत में प्रदशनकारियों का आह्वन करते हुए भाकपा-माले के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा ने कहा कि बिहार बंद मोदी-अमित शाह को खुली चुनौती दे रहा है. आम-अवाम उनसे कह रहा है कि उनकी विभाजनकारी नीतियां इस देश में नहीं चलने वाली है. संविधान व लोकतंत्र पर हमला हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने बंद समर्थकों का आह्वान किया कि आने वाले दिनों में इस लड़ाई को और व्यापक बनाने के लिए कमर कस लें. प्रतिवाद सभा को ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी के अलावा अन्य महिला व छात्र संगठनों के भी नेताओं ने भी संबोधित किया.


बिहार बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बंद समर्थकों की गिरफ्तारी की गई. नवादा के पकरीबरावां में 100 से अधिक माले समर्थकों को गिरफ्तार किया गया. वहीं, शेखुपरा में 300 वाम कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. गया सिविल लाइन्स में भी बंद समर्थकों ने गिरफ्तारी दी. बेगूसराय में माले व आइसा कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाइवे 31 को पूरी तरह जाम कर दिया. मुजफ्फरपुर के सकरा में एनएच 28 पर घंटों जाम लगाया गया. आइसा के छात्रों ने मगध विश्वविद्यालय को भी बंद करवाया. आइसा कार्यकर्ताओं ने कैंपस में मार्च करने के उपरांत नरेन्द्र मोदी का पुतला दहन किया. मुजफ्फरपुर में इंसाफ मंच के बैनर तले हजारों की संख्या में लोग संविधान बचाओ नारे के साथ सड़क पर उतरे. नालंदा में भी तकरीबन 5 हजार की संख्या बंद के समर्थन में सड़क पर उतर आई और शहर के सभी चौराहों को जाम कर दिया. गायघाट-मुजफ्फरपुर एनएच तथा बंदरा-मुजफ्फरपुर एनएच को जाम किया गया. पूर्णिया के लाइनबाजार इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम किया और बंद को सार्थक बनाया. बाद में आर एन साह चौक को भी जाम किया गया. मोतिहारी में वाम दलों ने संयुक्त रूप से छतौनी चैक पर आधे घंटे तक एनएच 28 पर यातायात परिचालन को बाधित किया. दरभंगा में सिमरी एनएच 57 को करीब तीन घंटे से अधिक समय तक जाम रखा गया. दरभंगा में भाकपा-माले कार्यकर्ताओं ने सुबह-सुबह जानकी एक्सप्रेस के परिचालन को बाधित किया. दरभंगा के ही लहेरियाराय स्टेशन पर जयनगर पटना कमला गंगा इंटरसिटी एक्सप्रेस को रोका गया. नालंदा के इसलामपुर में लोकल ट्रेन के परिचालन को माले कार्यकर्ताओं ने बाधित किया. जहानाबाद में भभुआ-पटना इंटरसिटी व 5 पीजी पैसेंजर को हजारों माले व वाम कार्यकर्ताओं ने ट्रैक पर चढ़ कर रोक दिया. रेल जाम करने के बाद उपरांत पटना-गया मुख्य पथ को जाम कर दिया गया. दुकानें अधिकांश बंद रहीं. रेलवे के अतिरिक्त राज्य के मुख्य पथों को भी प्रभावित किया गया है. आरा-सासाराम, अरवल-जहानाबाद, पटना-औरंगाबाद, पश्चिम चंपारण,मधुबनी, सिवान कटिहार, भभुआ, रोहतास, गया, नवादा, भागलपुर, गोपालगंज, अररिया आदि तमाम जगहों पर बंद का व्यापक असर दिखा.

अब देखने वाली बात यह होगी कि 21 दिसंबर को सीएए और एनआरसी के खिलाफ राजद का बिहार बंद का कितना असर पड़ता है. वैसे वाम दल ने राजद को इस बंद में शामिल होने का आह्वान किया था लेकिन राजद ने साथ नहीं दिया.

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