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ज्यादा जोगी मठ उजाड़ !

वीरेंदर नाथ भट्ट

लखनऊ.कानून व्यवस्था  के मसले हमलावर विपक्ष  के दबाव के चलते  उत्तर प्रदेश सरकार ने आनन् फानन में पिछले चालीस साल से  लटके फैसले  यानी  उत्तर प्रदेश पुलिस में पुलिस आयुक्त प्राणाली   को लागू कर दिया. प्रथम चरण में केवल लखनऊ और गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा  में पुलिस आयुक्त किये गए है. जिस तरह से जल्दबाजी में यह फैसला किया गया उससे ज्यादा जोगी मठ उजाड़ की कहावत चरितार्थ हो रही है. लखनऊ और नोएडा में भारतीय पुलिस सेवा का एक अधिकारी यानी वरिष्ट पुलिस अधीक्षक तैनात था, अब इनके स्थान पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी जिले का पुलिस प्रमुख होगा.  साथ  ही पुलिस महानिरीक्षक स्तर के दो संयुक्त आयुक्त दोनों जिलों में  तैनात किये गए है. लखनऊ  में  पुलिस उप महा  निरीक्षक स्तर के १० पुलिस उप आयुक्त तैनात किये गए हैं. .  अब इन  अधिकारीयों के संख्या एक जिले में एक दर्ज़न से भी  ज्यादा  हो गयी है. अकेले लखनऊ में  नयी  व्यवस्था के अनुसार ५६ अफसर जिसमे १३ भारतीय पुलिस सेवा के होंगे  . नोएडा में अब ३८ अफसर तैनात हो गए हैं जिसमे भारतीय पुलिस सेवा के १० अफसर होंगे.  प्रदेश पुलिस सेवा के  अधिकारीयों  की नाराजगी  के कारण सर्किल अफसर के स्थान पर सहायक पुलिस आयुक्त का पद दिया गया है.

पुलिस अफसरों का बड़ा वर्ग  सरकार  के इस फैसले से बहुत प्रसन्न है की आईएएस  अफसरों की लम्बी  अडंगेबाज़ी की बाद आखिरकार पुलिस आयुक्त प्राणाली लागू करने का फैसला हुया. भारतीय पुलिस सेवा के सेवा निवृत  अधिकारी विभूति नारायण राय  ने कहा ,यह देर से लिया गया  एक  अच्छा फैसला है यह एक सकारात्मक कदम है और उम्मीद करनी हिए की इसके अच्छे परिणाम होंगे  क्योंकि पुलिस को अपनी ड्यूटी करने के लिए जिन अधिकारों की जरुरत है वो उसे मिलेंगे  और निर्णय करने में समय कम  लगेगा . लेकिन उनका कहना है की बिना व्यापक पुलिस सुधार  मसलन पुलिस में  भर्ती ,  ट्रेनिंग  और परफॉरमेंस  के मानक  में सुधार  के बिना बेहतर नतीज़े नहीं मिलेंगे . राय कहते हैं की यह सरकार पुरानी सरकारों के पाप भी ढो  रही है क्योंकी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों  में  पुलिस भर्ती  में हुए जातिवाद  और घोटाले के कारण पुलिस में रिक्त पदों की संख्या एक लाख से अधिक है  और इतने खाले पदों को भरने के लिए समय चाहिए. १९७७ में केंद्र में  जनता पार्टी की सरकार के प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई  नें भारतीय पुलिस आयोग गठित  किया था. आयोग ने कुल आठ  रिपोर्ट सरकार को दी थी जिसमे छठवीं  रिपोर्ट में  १० लाख से अधिक की आबादी  के शहरों में पुलिस आयुक्त  न इयुक्त करने की सिफारिश की गयी थी. १५ राज्यों ने इस सिफारिश को अब तक लागू कर दिया है और उत्तर प्रदेश सोलहवां राज्य बन गया है.

एक रिटायर्ड पुलिस महा निदेशक का कहना है पुलिस प्रशाशन में  बिना व्यापक सुधारों के केवल पुलिस आयुक्त नियुक्त कर देने से विशेष अंतर नहीं आने वाला. ``१९९६ में प्रदेश के भूतपूर्व पुलिस  महानिदेशक प्रकाश सिंह ने पुलिस में  सुधार को   लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. २००६ में कोर्ट ने निर्देश दिया की हर  राज्य सरकार  सुरक्षा आयोग गठित करे  जो पुलिस प्रशाशन की नीतियां तय करेगा  और पुलिस में राजनितिक दखलदांजी को रोकेगा. पुलिस विभाग में ट्रान्सफर पोस्टिंग के लिए  एस्टाब्लिश्मेंट बोर्ड बनाने का भी आदेश दिया था. उत्तर प्रदेश में दोनों  पर कार्यवाही होना शेष है.'.


 

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