जनादेश

बाबा रामदेव का ट्विटर पर क्यों हुआ विरोध ? जेएनयू के छात्र यूं नहीं सड़क पर हैं गुदड़ी के लाल थे वशिष्ठ नारायण सिंह नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई नहीं रहे अब्दुल जब्बार भाई ध्यान से देखिये ,ये फोटो देश के महान गणितज्ञ की है ! नेपाल में शुरू हुआ चीन का विरोध जेएनयू में यह सब क्यों हो रहा है. कानून के राज को 'एक झटका' यह फैसला दिक्कत पैदा कर सकता है ! मेरे मित्र टीएन शेषन ! मोदी सरकार के समर्थन का यह कीमत मिली - तवलीन फैसला विसंगतियों से भरा- भाकपा (माले) तथ्यों से धराशाही हुए सियासत के तर्क! आरटीआई की धार भोथरी करती सरकार ! शाहनजफ़ इमामबाड़ा में ईद-ए-ज़हरा ! भाषा को रामनामी से मत ढकिये ! पर रात का खीरा तो पीड़ा ! नीतीश कुमार के दावे हवा-हवाई झारखंड चुनाव में बिखर रही हैं गंठबंधन की गांठें

अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों

(वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ गोकर्ण काशी के नगीना हैं। सैंकडों वर्ष से महात्म्य के कारण देश के कई भागों के लोग काशी के विभिन्न मोहल्ले में बसे हैं। आम तौर पर देश के विभिन्न भागों के राजे, महाराजे, जमींदार, समृद्ध लोग 'काशी-वास' के लिए भवन निर्माण करते और अपने इलाके के ब्राह्मणों को रहने के लिए दे देते थे। काशी का कॉस्मोपोलिटन चरित्र इस वजह से रहा है।)

इन दिनों वर्चुअल वर्ल्ड में एक वीडियो वायरल हो रहा है। जाने कितने लाख लोगों ने उसे अब तक देख लिया है। वीडियो में बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर से जुड़ी चीजें शूट की गयी हैं। वीडियो में कुछ तमिल तीर्थयात्री दिखते हैं। वीडियो के साथ ऑडियो हिन्दी में है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का नतीजा है कि अतिक्रमण से घिरे बाबा विश्वनाथ आज मुक्त हो कर सांस ले रहे हैं। खुद मोदी जी ने भी जब आठ मार्च को इस कॉरिडोर की आधारशिला रखी तब भी उन्होंने कहा कि चालीस हजार वर्गमीटर में बन रहे इस कॉरिडोर को जब हमने खाली कराया तो यहां 44 ऐसे अति प्राचीन मंदिर मिले जिन्हें इलाके के लोगों ने अतिक्रमण कर अपने घरों में छिपा लिया था। उन मंदिरों और शिवालयों में लोगों ने टॉयलेट बना लिया था।

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