जनादेश
गोवा और महादयी जल विवाद

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने हाल ही में महादयी जल विवाद मामले में महादयी जल विवाद न्‍यायाधिकरण के अंतिम फैसले को लागू करने वाली याचिका की सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने गोवा, महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्‍य सरकारों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम आदेश जारी करते हुए इस मामले की अंतिम सुनवाई जुलाई में किए जाने का फरमान सुनाया है. अदालत ने यह भी कहा कि अंतरिम आदेश महादयी पंचाट के फैसले के खिलाफ दायर तीनों राज्यों की ओर से दायर याचिकाओं के अंतिम परिणाम के अधीन है.  आपको बता दें कि महादयी पंचाट ने 14 अगस्त 2018 को अपने फैसले में कहा था कि महादयी घाटी बेसिन से कर्नाटक के लिए 13.42 टीएमसी फीट पानी आवंटित किया गया था जिसमें से 3.9 टीएमसी फीट मलप्रभा नदी बेसिन में छोडऩे की बात कही गई थी. महाराष्ट्र को 1.33 टीएमसी फीट और गोवा के लिए पंचाट ने 24 टीएमसी फीट पानी देने की बात कही थी.  कर्नाटक ने पचांट में याचिका दायर कर कलसा-बंडुरी परियोजना के लिए 7.56 टीएमसी फीट पानी छोडऩे की मांग की ताकि सूखा प्रभावित बेलगावी, हुब्बली-धारवाड़ और गदग जिले में पेयजलापूर्ति हो सके.  कलसा-बंडूरी परियोजना का उद्देश्य महादयी नदी के जल को मोड़कर उसे उत्तरी कर्नाटक के सूखा प्रभावित तीन जिलों में पहुंचाना है. 

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा है कि उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय से इस संदर्भ में आवश्यक कदम तुरंत उठाने का आग्रह किया है.  उन्होंने कहा कि किसानों और राज्य के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है.  उधर, जल संसाधन मंत्री रमेश जारकीहोली ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने हिस्से के 13.42 टीएमसीफीट पानी का उपयोग उचित तरीके से करेगी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सिंचाई परियोजाएं समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

इस फैसले पर गोवा के मुख्‍यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि राज्‍य सरकार सक्षम न्‍यायालय के समक्ष तीन से चार दिनों के अंदर  कर्नाटक राज्‍य सरकार द्वारा प्रश्‍नगत बांध एरिया में किसी प्रकार की गतिविधि न करने देने का आग्रह करेगी. राज्‍य सरकार सक्षम न्‍यायायलय से इस प्रकरण में स्‍टे आर्डर लेने का प्रयास करेगी. प्रमोद सावंत ने बताया कि उन्‍होंने सदन में बयान देते हुए कहा था कि कर्नाटक राज्‍य सरकार ने महादेयी बेसिन से एक निर्धारित जल की मात्रा को पहले ही अपनी ओर मोड़ रखा है. कर्नाटक राज्‍य सरकार के इतिहास की बात करें तो वहां की सरकार के अंदर सक्षम न्‍यायालय में वाद विचाराधीन होने के बावजूद वहां कार्य जारी रखने की आदत है. राज्‍य सरकार विशेषज्ञों की राय ले रही है और गोवा के पक्ष में एक विधिक समाधान निकालने का प्रयास कर रही है. 

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