जनादेश
राजस्थान में बढ़ते अपराध

विनोद पाठक

राजस्थान विधानसभा में जब 20 फरवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बजट पेश कर रहे थे, उसी दौरान नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीनों विधायक विधानसभा के गेट पर धरना देकर बैठे थे। वो नागौर के पांचौड़ी में दो दलित युवकों के साथ हुई बर्बरता का विरोध कर रहे थे, जिसकी खबर सुबह के अखबारों में सुर्खियां बनी थी। चूंकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कुछ नहीं कहा गया था, सो गहलोत निश्चितता से योजनाओं पर योजनाएं बताने में जुटे थे। लेकिन, जब तक वो भाषण खत्म कहते, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नागौर की घटना पर चिंता जता दी। राहुल गांधी के ट्वीट से खलबली ऐसी मची कि गहलोत से लेकर उप मुख्यमंत्री सचिन पायटल समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने घटना पर चिंता जताने में देर नहीं की। पहले ये सभी नेता क्यों चुप बैठे थे, यह कहना बड़ा मुश्किल है। लेकिन, राजस्थान में दलितों पर बढ़े अत्याचार चिंताजनक हैं। नागौर की घटना दिल दहलाने वाली है। यहां छोटी सी चोरी के आरोप में दो चचेरे भाइयों को पहले तो बेहरमी से पीटा गया और फिर एक भाई की गुदा में पेट्रोल सना पेचकस डाल दिया। वैसे घटना 16 फरवरी की थी, लेकिन 19 फरवरी को इस बर्बरता का वीडियो सामने आने के बाद ही हुआ। नागौर की घटना की आग शांत होने से पहले बाड़मेर का एक और वीडियो समाने आ गया। यहां भी चोरी के शक में युवक की प्राइवेट पार्ट में सरिया डाल दिया गया था।   

सरकार को बने 14 महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृह विभाग अपने पास ही रखा है। यानी कानून-व्यवस्था का जिम्मा भी उन्हीं पर है। राज्य में बढ़ रहे अपराधों पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जबकि आंकड़े डराने वाले हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार अनुसूचित जाति पर अत्याचार के मामलों में राजस्थान देश में अव्वल है। यहां दलितों पर अत्याचार की दर 45.50 प्रतिशत है। पिछले दिनों खुद राज्य के पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने पत्रकार वार्ता कर बताया था कि 2019 में अपराधों में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2018 की तुलना में 2019 में दुष्कर्म की घटनाएं 38.34 प्रतिशत बढ़ गई हैं। अपहरण, लूट, डकैती जैसे अपराध बढ़े हैं। यह तो पुलिस रिकॉर्ड बोल रहा है। जो मामले दर्ज नहीं हो रहे, उनकी संख्या तो और अधिक हो सकती है।

पिछले साल मई में अलवर के थानागाजी में दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना की खबर देश में सुर्खियों में छाई रही थी। दलित युवती के साथ पति के सामने ही कुछ युवकों ने हैवानियत की थी। उस वक्त राहुल गांधी ने युवती के परिवार से मुलाकात की थी। तब लगा था कि राज्य में अपराधों को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन अभी तक अपराध पर लगाम का रोडमैप नजर नहीं आया है। राज्य में बढ़ रहे अपराधों को लेकर विपक्षी भाजपा और बेनीवाल की पार्टी आरएलपी बेहद हमलावर है। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल नागौर में पीड़ित युवकों के घर गए थे। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि गहलोत सरकार का प्रदेश की कानून व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं है। भ्रष्टाचार, दबंगई, अराजकता के नए आयामों को छूती प्रदेश की सरकार सभी पहलुओं पर विफल हो चुकी है। प्रदेश भाजपा इकाई भी लगातार सरकार को हर मोर्चे पर घेर रही है। बेनीवाल सड़क पर उतरे हुए हैं। 

दूसरी ओर, राजस्थान में कांग्रेस अब भी दो ध्रुवों (गहलोत बनाम पायलट) में बंटी हुई नजर आ रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच का द्वंद्व साफ नजर आया है। बजट के बाद जब गहलोत पत्रकार वार्ता में पहुंचे तो सचिन साथ नहीं थे। पिछले दिनों कोटा में नवजातों की मृत्यु पर सचिन पायलट ने गहलोत को घेरा था तो उन्होंने भी कटाक्ष किया था। देखना यह होगा कि गहलोत राज्य की कानून-व्यवस्था को कैसे दुरुस्त करेंगे और क्या अगली मंत्रिमंडल विस्तार में गृह विभाग से मुक्ति पाएंगे?

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