जनादेश
कोरोना से कोलकाता के कारोबार को 450 करोड़ की चपत

प्रभाकर मणि तिवारी

 कोलकाता.कोरोना से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हाल के वर्षों में पनपे चिकित्सा पर्यटन के कारोबार को हर महीने साढ़े चार सौ करोड़ रुपए के नुकसान का अंदेशा है. बांग्लादेश से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाजे के लिए कोलकाता के विभिन्न निजी अस्पतालों में पहुंचते हैं. लेकिन इस सप्ताह सीमा सील होने, बांग्लादेश जाने वाली ट्रेनों, बसों और उड़ानों के बंद होने से वहां से लोगों का आना अचानक थम गया है. नतीजतन जहां तमाम निजी अस्पतालों के आउटडोर में सन्नाटा है वहीं होटल औऱ गेस्ट हाउस भी खाली पड़े हैं. बांग्लादेश से पेट्रापोल सीमा या उड़ानों के जरिए यहां पहुंचने वाले लोग इलाज और खरीददारी पर बारी रकम खर्च करते हैं. वहां से आने वाले लोगों में खरीददारी के लिए लोकप्रिय न्यू मार्केट जैसे बाजारों के दुकानदार भी अब मक्खियां मार रहे हैं.

मोटे आंकड़ों के मुताबिक, महानगर के निजी अस्पतालों में रोजाना आने वाले बाहरी मरीजों की तादाद में 30 से 40 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है. यह तादाद बांग्लादेशी मरीजों की है. इनसे तमाम अस्पतालों को महीने में तीन सौ करोड़ की चपत लगने का अंदेशा है. इसी तरह मध्य कोलकाता के विभिन्न बाजारों में दुकानदारों को 120 करोड़ के नुकसान हो सकता है. दर्जनों होटल बांग्लादेश से आने वाले इन मरीजों और उनके परिजनों के सहारे गुलजार रहते थे. लेकिन अब उनमें 90 फीसदी कमरे खाली पड़े हैं. निजी अस्पतालों के आस-पास बने गेस्टहाउसों में भी यही आलम है. होटलों को हर महीने 20 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अंदेशा है.


अकेले धर्मतल्ला इलाके के न्यू मार्केट में रोजाना पहुंचने वाले 50 हजार खरीददारों में से 20 हजार बांग्लादेशी होते थे. एक अनुमान के मुताबिक यह लोग रोजाना चार करोड़ की खरीददारी करते थे. लेकिन कोरोना ने सबकुछ ठप कर दिया है. एस.एस.हाग, जिसे न्यू मार्केट भी कहा जाता है, मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष असोक गुप्ता बताते हैं, बीते दो दशकों से यह बाजार बांग्लादेशी पर्यटकों पर ही टिका हुआ था. रोजाना यहां पहुंचने वाले खरीददारों में 40 फीसदी वही लोग होते थे. ईद और दूसरे त्योहारों के मौके पर उनकी तादाद दोगुनी हो जाती थी.

महानगर के सदर स्ट्रीट और मार्केस स्ट्रीट इलाके में बने दर्जनों होटल बांग्लादेशियों और विदेशी पर्यटकों के पसंदीदा ठिकाने रहे हैं. लेकिन बीते सप्ताह से ही यहां तलाशने पर भी कोई विदेशी नजर नहीं आ रहा है। एक होटल मालिक बताते हैं कि धंधा तो दो सप्ताह से मंदा चल रहा था. लेकिन बीते शनिवार से यात्रा पर पाबंदियां सख्ती से लागू होने के बाद होटल के तमाम कमरे खाली पड़े हैं. जो लोग यहां थे वह भी अफरा-तफरी में यहां से अपने देश लौट गए.

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