जनादेश

क्यों उछला बाजार ,जानना चाहेंगे ? असम में भी बढ़ने लगा कोरोना कोंकण में साबूदाने का स्वाद नेहरू अकेले रह गए कमल हासन ने क्या कहा पीएम से ट्रंप की जवाबी कार्रवाई का अर्थ क्या है डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा- हमें टारगेट ना करें काम खो चुके हैं 92.5 फीसदी मजदूर ट्रम्प ने जो गोलियां मांगी हैं उन्हें भारत ने अलग कर रखा है ! यूके कोई भारत जैसा देश थोड़े ही है फिर सौ साल बाद ? यह एक नई दुनिया का प्रवेश द्वार है महिलाओं ने भी दिखाई राह ! आखिर कही तो प्रतिकार होना था ! पश्चिम की दाल यह ऊटी की तरफ जाती सड़क है आज बाबूजी का जन्मदिन है जालंधर से हिमाचल घास पर बिखरे महुआ के फूल तो केरल में थम गई महामारी!

यह लाक डाउन कब तक चलेगा ?

गिरीश मालवीय 

नई दिल्ली .कोई नही जानता कि लॉक डाउन की यह स्थिति कब चलेगी.अब जो अनुमान लगाए जा रहे हैं उसके मुताबिक अब यह स्थिति लंबी चलेगी... आपको याद दिला दू कि जब से यह सरकार आयी है इसने बचत की प्रवृत्ति को निरुत्साहित करने के लिए हर वो उपाय किया है, जो जरूरी था, ..आप मोदी सरकार के हर साल पेश किए जाने वाले बजट को देख लीजिए आपको यह प्रवृत्ति साफ नजर आएगी, ...इस साल जो बजट आया है उसमे आयकर संबंधी प्रावधानों को जिस प्रकार तोड़ा मरोड़ा गया है उससे यह साफ नजर आ रहा है कि सरकार चाहती है कि जनता बचत ओर FD आदि में मिलने वाले ब्याज का लालच छोड़े ओर पैसा मार्केट में निवेश करें . स्टेट बैंक ने कुछ दिनों पहले ही सेविंग्स में मिलने वाली ब्याज दर को घटाया है और खबर ये भी है कि जल्द ही लोकप्रिय स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दर को भी कम किया जाएगा.सरकार का मन्तव्य साफ है बचत मत करो


यह बात मैं लगातार लिखता आया हूँ कि मोदी सरकार में लोगो की बचत घटती जा रही हैं.आँकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं मोदी सरकार के पिछले पांच साल में परिवारों का कर्ज दोगुना हुआ है जबकि इस दौरान खर्च करने वाली आमदनी ( डिस्पोजेबल इनकम ) महज डेढ़ गुना बढ़ी है.इसका नतीजा हुआ है कि देश की कुल बचत में 4 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है और यह 34.6 फीसदी से गिरकर 30.5 फीसदी पर सिमट गई है.

क्या आप जानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था की जान कहे जाने वाली घरेलू बचत 20 सालों में सबसे कम दर्ज की गई है.मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में प्रचलित इस धारणा को पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है कि यहां के लोग घरेलू बचत मे विश्वास करते हैं और उसी कारण देश की की इकॉनमी गंभीर से गंभीर संकट में खड़ी रहती है.मध्यम वर्ग का तो फिर भी ठीक था लेकिन निम्न मध्यम वर्ग ओर गरीब के पास दो ढाई महीने के खर्च के लायक बचत ही नही है यह लोग रोज कुआं खोदकर पानी पीते हैं उनका क्या होगा.शायद अब आप सही तरह से समझ पाए कि नवम्बर 2016 में किया गया नोटबन्दी मास्टर नही बल्कि डिजास्टर स्ट्रोक था .साभार 


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