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बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बिहार पहुंचे!

डा लीना

पटना. एक ओर जहां बिहार में कोरोना लगातार पैर पसार रहा है, वहीं 21 दिन के लॉकडाउन के कारण बिहार के बाहर फंसे अप्रवासी बिहारियों एवं बाहर से आये अब तक एक लाख 80 हजार 652 लोगों की मुश्किलें जारी हैं. साथ ही हर संभव मदद की बात करने वाली नीतीश सरकार पर विपक्ष का हमला भी जारी है.

बिहार में कोरोना से अब तक एक शख्स की मौत हुई है, जबकि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 24 पहुंच गई है. . 'गरूड़ एप' के जरिये निगरानी रखी जा रही है. राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा सीमा राहत केंद्र बनाये गये हैं. इसके अलावा गांवों के स्कूलों में आये प्रवासियों के लिए आवासन और भोजन की व्यवस्था की गयी है. कई राहत शिविरों में बदइंतजामी से क्वारेंटिन लोगों के शिविर छोड़ अपने अपने गांव /घर वापस होने की खबर ने सरकार की परेशानी भी बढा दी हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार में कोरोना को लेकर हो रही सरकारी कोशिशों पर सवाल खड़े किए है. कोरोना की जंग को और कारगर तरीके से लड़ने की बात कही है. तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि जहां दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यवासियों को कोरोना को लेकर कई बार संबोधित कर चुके है. वहीं नीतीश कुमार को अंततः 18वें दिन बिहार को संबोधित करने का समय मिलता है!


राहत कि तैयारी  पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को घेरा है और सवाल उठाया कि परीक्षण किट, पीपीई, मास्क, वेंटिलेटर, आईसीयू बेड, दस्ताने, सैनिटाइज़र की स्टॉकपाइल व खरीद पर भी अद्यतन जानकारी सरकार प्रदान नहीं कर रही है. इस जानकारी की माँग पहले ही दिन से हम सभी, मीडियाकर्मी, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कर रहे थे.कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने भी आरोप लगाया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के प्रति नीतीश सरकार की घोर लापरवाही राज्य को संकट में डालने वाला है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बिहार में कोरोना महामारी को लेकर नीतीश सरकार में कोई गंभीरता नहीं दिख रही है. कोरोना वायरस का संक्रमण जिस तेजी से राज्य में बढ़ रहा है और सरकार की ओर से इस मामले में जो कदम उठाए जाने चाहिए थे वह नहीं उठा रही है. कांग्रेस नेता ने कहा कि यह जानकारी और भी चौंकाने वाली है कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज में शामिल लोग जो पटना के कुर्जी मस्जिद में मिले थे उनकी भी जांच नहीं कराई गई है. इसी तरह इस मरकज में शामिल होकर बिहार लौटे कई अन्य लोग राज्य के अन्य हिस्सों में गए हैं लेकिन उनकी भी जांच की व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से नहीं की गई है.

जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए हरसंभव सहायता करने का भरोसा दिलाते हुए कहा है कि गरीब राज्य होने के बावजूद जो भी संसाधन है उसके माध्यम से प्रदेश में और बाहर फंसे लोगों की मदद की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एक करोड़ 68 लाख लोग राशनकार्डधारी है. इन सब लोगों के खाते में राज्य सरकार की ओर से एक-एक हजार रुपये भेजे जाने की शुरुआत हो चुकी है. वृद्धजन पेंशन, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेशन, वृद्धा पेंशनधारियों को तीन माह का पेंशन दिया जा रहा है.


साथ ही कोरोना वायरस पर आयोजित प्रधानमंत्री की वीडियो कान्फ्रेंसिंग में शामिल हुये मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को कहा कि हमारा आग्रह दवाओं और इक्यूपमेंट की उपलब्धता को लेकर है। लेबोरेट्री टेस्ट को प्रभावी बनाने के लिए भारत सरकार से अधिकृत टेस्टिंग कीट्स और उसके साथ उपयोग में आने वाली अन्य सामग्री जैसे बी.पी., आर.एन.ए. एक्सट्रैक्शन किट आदि को समाहित करते हुए एक सेट के रुप में दिया जाए, जिसका काफी अच्छा परिणाम होगा। इसके साथ ही कोविड-19 की रोकथाम और उपचार के लिए जो सामग्री हैं जैसे एन- 95 मास्क, पी.पी.ई. किट का इंतजाम होना चाहिए। नीतीश कुमार ने कहा कि वेंटिलेटर के बारे में भी हमलोगों ने बात की है। 5 लाख पी.पी.ई. किट की हमलोगों ने मांग की है, अभी तक 4 हजार ही मिल पाया है। इसके साथ ही 10 लाख एन- 95 मास्क की हमलोगों ने मांग की है, जिसमें से अभी तक 50 हजार ही मिल पाया है। 10 लाख सी प्लाई मास्क की मांग की गई है, जिसमें से अभी तक 1 लाख मिल पाया है। 10 हजार आर.एन.ए. एक्सट्रैक्शन किट की मांग की गई है, जिसमें से अभी तक 250 ही मिल पाया है। हमलोग कम से कम 100 वेंटिलेटर चाहते हैं, अभी तक ये उपलब्ध नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि इन सब चीजों की उपलब्धता से संक्रमित लोगों के इलाज में सहुलियत होगी।

अब जबकि लॉक डाउन के दौरान भी लाखों कामगार राज्य में पहुँच चुके हैं, विदेश से आने वाले कई लोगों को राज्य सरकार अबतक ट्रेस नहीं कर सकी है और क़तर से आए सैफ की कोरोना से मौत हो चुकी है, यानी स्क्रीनिंग की अनदेखी हुई है. ऐसे में बिहार सरकार के समक्ष कोरोना से लड़ना एक गंभीर चुनौती है.  

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