राशन कार्ड गिरवी रखो और कर्ज लो !

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राशन कार्ड गिरवी रखो और कर्ज लो !

प्रभाकर मणि तिवारी

कोलकता .पश्चिम बंगाल में झारखंड से सटे कुछ इलाके ऐसे हैं जहां लोगों को अपनी तमाम जरूरतो के लिए महाजन से कर्ज लेने की खातिर राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ता है. राशनकार्ड इसलिए कि पुरुलिया जिले के इन आदिवासी गांवों में यही इनकी एकमात्र पूंजी है. वह तो कोरोना की वजह से अगर ममता बनर्जी सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को मुफ्त राशन देने का एलान नहीं किया होता तो पुलिस और प्रसासन की ऐन नाक के नीचे चलने वाले इस धंधे को कभी खुलासा नहीं होता. अब इस मामले की पोल खुलने के बाद प्रशासन ने महाजन के कब्जे से राशकार्ड लेकर उनको असली हकदारों को तो सौंप दिया है. लेकिन कार्ड गिरनी रखने वालो के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसकी वजह यह है कि गांव वाले इस बारे में कोई लिखित शिकायत करने को तैयार नहीं हैं. अब भला पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर कौन करता है.


पुरुलिया जिले के ग्रामीण इलाकों में लोग महाजन से खेती और इलाज के लिए राशन कार्ड गिरवी रख कर पैसे लेते रहे हैं. इसके एवज में महाजन सार्वजनिक वितरण प्रणाली से मिलने वाला सस्ता अनाज लेकर बेचता रहा है. इसकी पोल उस समय खुली जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन की वजह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीबी रेखा से नीचे रहने वाल को छह महीने तक हर महीने पांच किलो चावल और ढाई किलो गेहूं देने का एलान किया. लॉकडाउन के दौरान सरकारी सुविधाओं से वंचित आदिवासी जब स्थानीय बीडीओ के पास पहुंचे तो इस बात का पता चला. उसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित महाजनों से लोगों के राशन कार्ड लेकर आदिवासियों को सौंपा. राशन के वितरण में होने वाली अनियमितताओं से नाराज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते सप्ताह खाद्य सचिव मनोज अग्रवाल को हटा कर परवेज अहमद सिद्दिकी को नया सचिव बनाया है.


जिले के झालदा ब्लाक के सरोजमातू गांव में लगभग डेढ़ सौ परिवार रहते हैं.इन सबके राशनकार्ड महाजन के पास गिरवी रखे थे. गांव के एक बुजुर्ग गौड़ कालिंदी बताते हैं कि उन्होंने 10 साल पहले पत्नी के इलाज के लिए एक महाजन से 10 हजार रुपए का कर्ज लिया था. उसके बदले राशन कार्ड गिरवी रखना पड़ा था. झालदा के बीडीओ राजकुमार विश्वास बताते हैं कि फिलहाल महाजनों से राशनकार्ड लेकर संबंधित लोगों को सौंप दिया गया है. लेकिन दोनों पक्षों में आपसी समझौता होने की वजह से गांव वालों ने महाजन के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है. पुरुलिया के जिलाशासक राहुल मजुमदार कहते हैं कि लॉकडाउन नहीं होता तो यह बात सामने ही नहीं आती.


खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने इस घटना पर हैरत जताई है। उनका कहना है कि  मैंने जिलाशासक व पुलिस अधीक्षक को इस मामले में हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया है. जिले के बाकी तमाम गांवों में भी जांच की जा रही है ताकि ऐसे मामले की पुनरावृत्ति नहीं हो. यहां इस बात का जिक्र जरूरी है कि राशनकार्ड दूसरे को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. बावजूद इसके इलाके में बरसों से यह धंधा चल रहा था.फोटो--संजय बनर्जी



 


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