जनादेश

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महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट की

आलोक कुमार 

भोपाल . केरल के रहने वाले हैं पी. व्ही. राजगोपाल.उन्होंने सेवा ग्राम में अध्ययन किया और 70 के दशक में मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में डकैतो के पुनर्वास का काम किया था. बाद के वर्षों में वे देश के कई राज्यों का दौरा करते रहे और आदिवासी लोगों की समस्याओं को समझने की कोशिश की. 1991 में राजगोपाल ने एकता परिषद नाम के संगठन की स्थापना की थी. उनकी संस्था मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से संचालित है, जिसके वे अध्यक्ष हैं. इसके अलावा राजगोपाल गांधी पीस फाउंडेशन के उपाध्यक्ष भी हैं.

बताते चले कि प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक पीवी  राजगोपाल के नेतृत्व में जन संगठन एकता परिषद एवं समान विचारधारा के लोग मिलकर 2007 में ‘जनादेश’ नाम की मुहिम चलाई थी. मप्र के ग्वालियर से 25 हजार भूमिहीन दिल्ली तक मार्च किया था.जन सत्याग्रह 2012 में ग्वालियर से पदयात्रा करके एक लाख भूमिहीन मोहब्बत की नगरी आगरा पहुंचे ,तो द्विपक्षीय समझौता केंदीय सरकार व जन संगठन के बीच हुआ. जल,जमीन और जंगल को लेकर ग्वालियर से शुरु हुआ 25 हजार भूमिहीन ग्रामीणों और किसानों का आंदोलन मुरैना में समाप्त हो गया.इस आंदोलन को जन आंदोलन 2018 नाम दिया गया था.एकता परिषद ने कहा था कि आचार संहिता लागू होने के चलते सत्ताग्रह को समाप्त कर दिया गया. अगर आश्वासन पर अमल नहीं होता है तो फिर सड़कों पर उतरेंगे. इन तीनों यात्रा में पटना के पत्रकार आलोक कुमार उपस्थित रहे.


एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक आनिश ने बताया कि 02 अक्टूबर 2019 से राजघाट पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करके जय जगत यात्रा शुरू की गयी. देश से निकलकर विदेश में यात्रा करके 

जय जगत यात्रा के संचालक श्री पी वी राजगोपाल के नेतृत्व में जेनेवा जाना था. उन्होंने कहा कि जब जय जगत यात्रा 12 फ़रवरी को आर्मीनिया पहुँची, आर्मीनिया के सांसदों ने यात्रा को संसद में आमंत्रित किया और स्वागत किया. यात्रा के ईरान सीमा के आगाराक ग्राम से निकलने के 20 दिन बाद फिर माननीय होवानेस जी यात्रियों से येघेगनाज़ोर में जुड़े और एक दिन साथ में यात्रा की. यात्रा का एक अहम प्रसंग था खोर विराप मोनास्टरी (चर्च ) में, जो आर्मीनिया के विशेष स्थलों में है , क्योंकि ईसाई धर्म चौथी शताब्दी में आर्मीनिया में यहीं स्थापित हुआ था. यहाँ पर राजगोपाल  ने डव पंछी को शांति चिन्ह के रूप में आसमान में छोड़ा, और आर्मीनिया के नरसंहार की स्वीकृति की घोषणा की. राजगोपाल जी ने आर्मीनिया सरकार को ये आश्वासन भी दिया की हम भारत वापसी पर भारत सरकार से विनती करेंगे की आर्मीनिया में हुए भयानक नरसंहार को माना जाए , और इसे "विश्व की हर नरसंहार की समाप्ति" के चिन्ह के रूप में माना जाय.

जय जगत यात्रा के संचालक पी वी राजगोपाल आर्मीनिया में हैं.उनके साथ जय जगत यात्रा की संयोजक जिल कार- हैरिस भी हैं. इन दोनों के हाथों 15 मई को विश्व स्तर पर यात्रा का समर्थन करने वाले सांसदों और सरकारी प्रतिनिधियों का सम्मान करने के लिए इंडो-आर्मीनिया फ्रेंडशिप ग्रुप के संस्थापक होवानेस होवहासियान को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट किया. इस प्रतिमा का निर्माण गांधी  आश्रम सेवाग्राम में जालंदर नाथ ने किया था, जो इस यात्रा के एक पदयात्री हैं.  यह प्रतिमा आर्मीनिया और विश्व स्तर पर यात्रा का समर्थन करने वाले सांसदों और सरकारी प्रतिनिधियों का सम्मान करने के लिए भेंट किया गया.

राजगोपाल जी ने प्रतिमा के भेंट के उपलक्ष्य पर सेवाग्राम में गाँधी जी की छोटी सी कुटिया के सामने बैठ प्रतिमा के निर्माण की कहानी सुनाई, और गाँधी जी की सादगी को दर्शाया. राजगोपाल जी ने कहा "गाँधी जी ने लोगों से साधारण रूप से जीने की विनती की, ताकि साधारण लोग भी जी सकें", और होवानेस जी ने समर्थन में कहा की आर्मीनिया में गाँधी जी के इस ही सन्देश की आज आवश्यकता है. आर्सेन ख़ारातयान, जो आलिक मीडिया के संपादक और जय जगत के आर्मीनियाई प्रबंधक हैं, आर्मीनिया और हिंदुस्तान में दोस्ती की बढ़ती गहराईयों की चर्चा की, जो जय जगत के प्रभाव से हुआ है (फ़ोटो में लाल स्वैटर). जिल कार-हैरिस जी ने आर्मीनिया की तरफ़ से जय जगत को मिली  मदद के बारे बात की, और रीस्टार्ट ग्रुप की मदद को सराहा, खासतौर में डाविट पेत्रोस्यान और आगाबेग सिमोनियान (चित्र में बाएं कोने में).

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