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साढ़े चार दशक बाद फिर चीन सीमा पर मुठभेड़

आलोक कुमार

पटना.ऐसा करीब 45 साल बाद हुआ है कि भारत-चीन बॉर्डर पर हिंसा में किसी सैनिक की शहादत हुई हो.वैसे माना जाता है कि एलएसी बॉर्डर पर आखिरी फायरिंग (दोनों तरफ से) 1967 में हुई थी, लेकिन ऐसा सच नहीं है। चीन की तरफ से 1975 में भी भारतीय सैनिकों पर हमला हुआ था.अरुणाचल प्रदेश में तुलुंग ला में हुए संघर्ष में चार भारतीय जवानों की शहादत के बाद यह इस तरह की पहली घटना है. अधिकारिक तौर पर पुष्टि की गयी है कि 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं.भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि 20 में से 17 सैनिक बेहद गंभीर रूप से घायल थे और हिंसक झड़प के बाद इन्हें वापस लाया गया. पहले 3 जवानों की शहादत की खबर थी फिर 17 जवानों ने दम तोड़ दिया जिसकी वजह से शहीद सैनिकों की संख्या 20 तक पहुंच गई.वहीं चीन के कम से कम 43 सैनिक हताहत हुए हैं.

भारत और चीन के बीच आखिरी गोली 1967 में चली थी. यानी 53 साल पहले. यह हिंसक झड़प सिक्किम में हुई थी. चीन वहां इसलिए चिढ़ा हुआ था क्योंकि 1962 की जंग के बाद भारत उस इलाके में अपनी स्थिति लगातार बेहतर कर रहा था. 1967 की इस जंग में भारत के 80 जवान शहीद हुए थे. वहीं चीन के करीब 400 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी. दोनों देशों की तरफ से आखिरी गोलीबारी 1967 में जरूर हुई थी लेकिन इसके 8 साल बाद भी चीन ने घात लगाकर हमला किया था.इसमें चार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. लाख तनाव के बावजूद चीनी सीमा पर हिंसा नहीं होने की तारीफ पीएम नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं.उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में कहा था कि दोनों देशों तरफ से बॉर्डर पर एक भी गोली नहीं चलाई गई है जो दोनों की ही ‘परिपक्वता’ दिखाता है. अब तक जब कोरोना वायरस पर खुलती पोल के बीच चीन बौखलाया हुआ है तो क्या भारत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसपर अपना स्टैंड बदलेंगे? यह देखना होगा.


पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ कल रात हुई हिंसक झड़प में 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू वीरगति को प्राप्त हुए.सेना के सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कर्नल संतोष गलवान घाटी में पैट्रोलिंग पॉइंट 14 के करीब हुई झड़प में शहीद हुए. उनके साथ ही हवलदार पलानी और सिपाही ओझा ने भी देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया. कर्नल बी संतोष तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के थे और उन्होंने 2 दिसंबर 2019 को ही 16 बिहार रेजिमेंट की कमान संभाली थी.बता दें, लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस झड़प में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए. 70 के दशक के बाद पहली बार एलएसी पर भारतीय जवानों की शहादत हुई है.


आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बिस्वा भूषण हरिचंदन ने 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी संतोष बाबू और दो जवानों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने लद्दाख की गलवान घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.राज्यपाल ने एक संदेश में कहा कि वह अधिकारी और दो सैनिकों द्वारा किए गए अंतिम बलिदान के लिए बहादुर दिलों को सलाम करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में शहादत प्राप्त की. इसके साथ ही राज्यपाल ने शहीदों के परिवारों के सदस्यों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की.


संतोष अपने पीछे पत्नी, नौ साल की बेटी और चार साल के बेटे को छोड़कर गए हैं. मंगलवार दोपहर बेटे के शहीद होने की खबर सुनकर उनके माता-पिता को विश्वास ही नहीं हुआ और वे स्तब्ध रह गए.मां ने बताया कि हमारी बहू दिल्ली में है और उसे कल रात सूचित किया गया था. हमें दोपहर में खबर मिली.मां मंजुला ने कहा, ‘ मैंने आखिरी बार उससे रविवार रात को बात की थी। मैंने उससे बातचीत के बाद दोनों सेनाओं के वापस आने की खबरों के बारे में पूछा, तो उसने मुझसे कहा कि मुझे इन खबरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि बातचीत अलग है और जमीनी हकीकत अलग है। उसने कहा कि स्थिति गंभीर है। मैंने उसे अपना ख्याल रखने के लिए कहा था।‘


संतोष के पिता उपेंद्र सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं. उन्होंने कहा, ‘हम विश्वास करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन कहा गया कि यह सच है। हमने अपना बेटा खो दिया है.‘उन्होंने याद किया कि संतोष छठी कक्षा में सैनिक स्कूल में शामिल हुए थे.उन्होंने कहा, मैं सेना में सेवा करना चाहता था, लेकिन मैं अपना यह लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया. मुझे अपने बेटे के माध्यम से अपने सपने को पूरा करने का मौका मिला.वह बहुत प्रतिभाशाली था और उसे 15 साल की सेवा में कई पदोन्नति मिली.संतोष बाबू 16वीं बिहार रेजिमेंट में थे और पिछले डेढ़ साल से भारत-चीन सीमा पर तैनात थे. उन्होंने अपने माता-पिता से कहा था कि उन्हें जल्द ही हैदराबाद स्थानांतरित कर दिया जाएगा, लेकिन कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई.


सूत्रों की मानें तो सीमा विवाद को लेकर जब बॉर्डर पर कमांडरों की बैठक हुई तो उसमें तय हुआ कि च्च्14-15-17 पर चीन स्।ब् के उस ओर जाएगा, लेकिन चीनी सैनिकों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. भारत की ओर से बार-बार चीन को समझाया गया, लेकिन चीन ने इस दौरान हमला कर दिया. सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की. लोहे के नाल, कीलें लगी लठ से भारत की सेना पर हमला किया. जो अफसर इस मामले को लीड कर रहे थे, उन्हें पथराव-झड़प में काफी गहरी चोटें आई हैं.


इस घटना के बाद चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आया है. बीजिंग ने उलटे भारत पर घुसपैठ करने का आरोप लगाया है.बीजिंग का आरोप है कि भारतीय सैनिकों ने बॉर्डर क्रॉस करके चीनी सैनिकों पर हमला किया था. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत ऐसी स्थिति में एकतरफा कार्रवाई न करे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास से विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा स्टाफ के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम की करीब आधे घंटे मीटिंग हुई. यह एक दिन में लगातार दूसरी समीक्षा बैठक थी. इस बड़े घटनाक्रम के बाद सीमा पर इस घटना के बाद दोनों देशों बीच स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. हालांकि दोनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मुलाकात कर हालात संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हालात की समीक्षा के लिए दो अहम बैठकें कर चुके हैं. सुबह उन्होंने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की.इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए. शाम की बैठक में विदेश मंत्री, सीडीएस और आर्मी चीफ शामिल हुए. सीमा पर पिछले 41 दिन से तनाव था.इसे कम करने की कोशिशें भी हो रही थीं.इसी बीच, 15 जून की शाम भारतीय सेना बातचीत करने गई थी, लेकिन चीन की सेना ने अचानक हमला कर दिया.लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प में भारत के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए. यह तब हुआ, जब दोनों ओर से एक भी गोली नहीं चली. यह खूनी झड़प लद्दाख में 14 हजार फीट ऊंची गालवन वैली में हुई. गालवन वैली वही इलाका है, जहां 1962 की जंग में 33 भारतीयों की जान गई थी.


 

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