स्वामी अग्निवेश गंभीर हालत में

क्या मुग़ल काल भारत की गुलामी का दौर था? अधर में लटक गए छात्र पत्रकारों के बीमा का दायरा बढ़ाए सरकार बिहार चुनाव से दूर जाता सुशांत का मुद्दा सड़क पर उतरे ऐक्टू व ट्रेड यूनियन नेता किसानों के प्रतिरोध की आवाज दूर और देर तक सुनाई देगी क्या मोदी के वोटर तक आपकी बात पहुंच रही है .... खेती को तबाह कर देगा कृषि विधेयक- मजदूर किसान मंच दशहरे से दिवाली के बीच लोकतंत्र का पर्व बेनूर हो गई वो रुहानी कश्मीरी रुमानियत सिविल सर्जन तो भाग खड़े हो गए चंचल .. चलो भांग पिया जाए क्यों भड़काने वाले बयान देते हैं फारूक अब्दुल्ला एक समाजवादी धरोहर जेपी अंतरराष्ट्रीय सेंटर को बेचने की तैयारी कोरोना के दौर में राजनीति भी बदल गई बिशप फेलिक्स टोप्पो ने सीएम को लिखा पत्र राफेल पर सीएजी ने तो सवाल उठा ही दिया हरिवंश कथा और संसदीय व्यथा राष्ट्रव्यापी मजदूरों के प्रतिवाद में हुए कार्यक्रम समाज के राजनीतिकरण पर जोर देना होगा

स्वामी अग्निवेश गंभीर हालत में

सुनीलम

स्वामी अग्निवेश जी कई दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं. वे लीवर की समस्या से पीड़ित है,लीवर का ट्रांसप्लांट होना है ,डोनर भी मिले लेकिन कोरोना पीड़ित हो गए.अभी पता चला कि वे वेंटीलेटर पर है.हम सब उनके जल्दी से जल्दी स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं. स्वामी जी भगवाधारी है लेकिन क्रांतिकारिता में उन्हें आजादी के बाद के शीर्षस्थ क्रांतिकारियों में गिना जा सकता है.स्वामी जी आर्य समाज के अध्यक्ष है. कर्मकांड और अंधविश्वास पर जबर्दस्त प्रहार करते हैं. तेलुगु भाषी होने के बावजूद उन्हें हिंदी अंग्रेजी के अलावा कई भाषाओं का ज्ञान देखकर  विवेकानन्द को याद करते हैं.

 उनकी ख्याति बंधुआ मजदूरों के मुद्दों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के तौर पर स्थापित करने को लेकर रही है. उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को बंधुआ मजदूरों के मुक्ति और पुनर्वास को लेकर कानून बनाने को मजबूर किया है. मैंने सबसे पहले नोबेल पुरस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी जी को उनके कार्यकर्ता के तौर पर देखा था.  बाद में वह स्वामी जी से अलग हो गए लेकिन दुनिया में सभी इस बात को जानते और मानते हैं कि कैलाश सत्यार्थी स्वामी अग्निवेश जी के चेले रहे हैं.   

  जब मैं 1982 में दिल्ली गया तथा युवा जनता दल के महामंत्री होने के कारण जंतर मंतर में आना जाना रहा तभी से स्वामी जी से लगातार मुलाकात होते रही. हरियाणा की जनता पार्टी की सरकार में वे मंत्री रहे. मंत्री के तौर पर भी उनके काम को सराहा गया. पार्टी के चुनाव में मैंने उन्हें चंद्रशेखर जी को चुनौती देते देखा. उनका सामान भी जंतर-मंतर से फेंका गया परंतु वे आज भी जंतर-मंतर में जमे हुए हैं. उनका जंतर मंतर में रहना देश भर के आंदोलनकारियों के लिए अत्यंत महत्व का है क्योंकि वे एक ऐसे व्यक्ति है जो सदा मदद के लिए तैयार रहते हैं. तमाम देशभर के आंदोलनकारी साथी स्वामी जी के यहां भोजन भी करते, विश्राम भी करते हैं कार्यालय का इस्तेमाल वाचनालय के रूप में तथा अधिकारियों और मंत्रियों को पत्र लिखाने के लिए भी होता है. जब भी कभी स्वामी जी दिल्ली में होते हैं जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम के लिए समय भी देते हैं. स्वामी जी देश का ऐसा कोई भी कोना नहीं, जहां आंदोलनकारियों के समर्थन में वहां पहुंचे न हो. स्वामी जी के भाषण के देश और दुनिया में करोड़ों लोग कायल हैं. स्वामी जी का भाषण मुर्दों में भी जान फूंकने वाला है.

       मुझे याद है जब अन्ना हजारे जी का पहला आंदोलन दिल्ली में हुआ तब जंतर मंतर की दीवार से सटाकर मंच बनाया था जिसका वे संचालन कर रहे थे. भीड़ में स्वामी जी ने जब मुझे देखा तो उन्होंने मुझे माइक से आवाज देकर बुलाया. मैं मंच पर नहीं गया क्योंकि मेरे सामने ही  आंदोलन को समर्थन देने आए ओम प्रकाश चौटाला और उमा भारती को अन्ना के समर्थनकों द्वारा हुट कर दिया गया था. मैंने स्वामी जी को मंच के बगल में जाकर बता दिया कि मैं समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय सचिव हूं इसलिए मंच पर जाना उचित नहीं होगा परंतु उन्होंने अन्ना जी, जो मुझे पहले से ही जानते थे,को सब कुछ बतलाकर मुझे मंच पर बुलाने की अनुमति दे दी. इस तरह मैं अन्ना आंदोलन से तौर पर जुड़ गया. बाद में मुझे कोर कमेटी में भी शामिल कर लिया गया. पहली कोर कमेटी की बैठक में पहली बार शामिल होने के लिए प्रशांत भूषणजी के घर पहुंचा तब मैंने अजीब दृश्य देखा. कोर कमेटी में जो अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया की संस्था के साथी थे वे स्वामी अग्निवेश जी के कांग्रेस से रिश्ते को लेकर सवाल जवाब कर रहे थे. मुझे यह देखकर बहुत बुरा लगा मैंने स्वामी जी के तपस्वी और संघर्षशील जीवन पर बोलना शुरू कर दिया जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया. मुझे पहली बैठक में ही समझ में आ गया  कि अरविंद केजरीवाल सब कुछ अपने हाथ में केंद्रित करके रखना चाहते हैं. बाद में जो कुछ हुआ ,वह सर्वविदित है. मुझे लगता है कि वह स्वामी जी के साथ बहुत बड़ा अन्याय था. मैंने और मेघा जी ने बहुत प्रयास किया कि दोनों पक्षों की सार्वजनिक बयानबाजी बंद हो लेकिन किरण बेदी के बड़बोले बयानों ने बात बिगाड़ दी. स्वामी जी  विलेन बना दिए गए. मुझे फिर उनके साथ शराबबंदी आंदोलन में काम करने का मौका मिला. हमने राष्ट्रीय स्तर पर नशा मुक्ति आंदोलन चलाया जिसके कार्यक्रमों में स्वामी जी ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की. उनका सबसे बड़ा योगदान सभी धर्मो के धर्मगुरुओं को शराबबंदी के लिए एकजुट  करने का रहा. मुलताई गोलीचालन के बाद उनके द्वारा किया गया सहयोग भुला नहीं सकता. सुरेंद्र मोहन जी के साथ उन्होंने किसान संघर्ष समिति को जीवित रखने में तथा किसानों पर किए जा रहे पुलिस दमन को रोकने  में बहुत बड़ी भूमिका निभाई. मुझे याद है कि जब आष्टा में किसान पंचायत हुई तथा पंचायत परिसर में किसान पंचायत पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं करने दी जा रही थी तब एक खेत में उन्होंने महापंचायत को संबोधित कर उस  मुख्यमंत्री को खुली चुनौती दी थी जिससे उनकी मित्रता रही थी. उन्होंने गुलाब देशमुख के घर में बैठकर कार्यकर्ताओं के साथ भोजन किया था. उसके बाद चुनाव में भी वे मुलताई और बैतूल आए. मेरे पूरे परिवार के साथ उनका घनिष्ठ संबंध रहा है. 

जब भी कोरोना काल के पहले उनसे मिला वे सदा एक ही बात कहते है हमको मिलकर कुछ बड़ा करना है,जो कुछ हम सब कर रहे हैं उससे काम चलने वाला नहीं.मैं उनको एक ही जबाब देता रहा स्वामी जी हम सब आपके साथ हैं. स्वामी जी कुछ नया खड़ा करने के लिए कई बैठकें बुलाते रहे कई साथियों के द्वारा बुलाई जाने वाली बैठकों में जाते रहे .लेकिन बात बनी नहीं.

उम्मीद है वे फिर स्वस्थ होकर आएंगे . हम मिलकर आज की चुनौतियां का मुकाबला करने के लिए कोई व्यापक मंच खड़ा कर पाएंगे.हम सब उनके जल्दी से जल्दी स्वस्थ होने की कामना करते हैं आप भी प्रार्थना करें और दुआ करें.

  • |

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :