किसान चाची से मिले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा

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किसान चाची से मिले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा

आलोक कुमार
मुजफ्फरपुर. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खुद को रोक नहीं सकें.बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड में किसान संवाद से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा निकटवर्ती आनंदपुर गांव में किसान चाची पद्मश्री राज कुमारी देवी से मिलने उनके घर गए.कहा जाता है कि किसान चाची संघर्ष का नाम है. सामाजिक व पारिवारिक बेड़ियों को तोड़कर गांव की पगडंडियों से शुरू किया उनका सफर आज महानगरों तक पहुंच गया है.स्वावलंबन की खींची गई उनकी लकीर पर आज पूरा समाज चल रहा है.स्वावलंबन की इसी महक से आनंदपुर गुलजार होगा.

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड में किसान संवाद से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा निकटवर्ती आनंदपुर गांव में किसान चाची पद्मश्री राज कुमारी देवी से मिलने उनके घर गए.उन्होंने कृषि के क्षेत्र में किसान चाची के योगदान, महिलाओं को उनके द्वारा दी गई ट्रेनिंग की जानकारी ली और कृषि उत्पादों का मुआयना किया.नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता देखिए, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने मुजफ्फरपुर की किसान चाची राजकुमारी देवी को वहां बुलाकर सम्मानित किया. जब वे प्रधानमंत्री बने किसान चाची को पद्मश्री पुरस्कार मिला.यह एक उन्नत समाज को खड़ा करने का प्रयास है.

रोल मॉडल बन चुकीं किसान चाची से मिलने गए.इसके अलावा वे इलाके की महिला किसानों से भी मिलें.साथ ही क्षेत्र के 50 प्रगतिशील किसानों से भी रूबरू हुए. भाजपा अध्यक्ष की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की मुहिम का हिस्सा माना गया .क्योंकि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के शुभारंभ पर गुरुवार को पीएम ने बिहार के गांवों की महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों की तारीफ की थी.अब जबकि बिहार विधानसभा की डुगडुगी बजने वाली है. जेपी नड्डा की इस यात्रा से किसानों की नब्ज टटोलने के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने में एनडीए को सहायता मिलेगी.



महिला सशक्तीकरण की मिसाल राजकुमारी देवी (62) जिला नहीं बड़ी हस्तियों की भी प्रेरणास्रोत हैं. इसमें पीएम मोदी, अमिताभ बच्चन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं.इसके पीछे पिता के घर से विदा होने के बाद से शुरू हुए कठिन सफर की उनकी कहानी है. राजकुमारी देवी कहती हैं, शादी के कई वर्ष तक संतान नहीं होने के कारण पहले से तिरस्कार झेल ही रही थी.उस पर से खेती शुरू की. परिवार के साथ अब समाज ने बहिष्कृत कर दिया.मगर, यह सफर शुरू हुआ तो पारिवारिक कारवां भी आगे बढ़ा.दो बेटियां व एक बेटे के रूप में तीन संतानों का जन्म भी हुआ.

 घर की दहलीज के पार खेत में कदम रख मुज़फ़्फ़रपुर के  सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की राजकुमारी देवी पहले 'साइकिल चाची और फिर 'किसान चाची  बनीं. पहले उन्हें किसानश्री और अब पद्मश्री से नवाजा गया है. राजकुमारी देवी समाज के लिए आदर्श बन गई हैं. घर से बाहर कदम रखने पर जिसने ठुकराया था, वही समाज व परिवार आज उनके कारण अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहा है.रूढि़वादी समाज जैसे-जैसे सख्त हो रहा था. राजकुमारी का संकल्प उतना ही मजबूत हो रहा था. कुछ बेहतर करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया। पूसा कृषि विश्वविद्यालय से जुड़कर आधुनिक तरीके से खेती के गुर सीखे. अचार व मुरब्बे के काम को बढ़ाया.आसपास की महिलाएं व युवतियों को प्रशिक्षण दिलाकर इस काम में लगाया.स्थिति बदलने लगी.दो बेटी व एक बेटा के रूप में तीन संतानें भी जन्म लीं.

महज डेढ़ सौ रुपये से शुरू किया गया कारोबार बढ़ता गया. इसके साथ ही नाम भी.बिहार सरकार ने वर्ष 2007 में किसानश्री से सम्मानित किया.यह सम्मान पानी वालीं एकमात्र महिला थीं. इस सम्मान के बाद ही 'साइकिल चाची' का नाम किसान चाची हो गया.

राजकुमारी ने खेती के साथ छोटे-मोटे कृषि उत्पाद बनाने शुरू किए.साथ ही साइकिल उठाई और मेला-ठेला व घर-घर जाकर इसकी बिक्री शुरू की. तब पति अवधेश कुमार चौधरी भी नाराज हो गए.वे अब भी कहते हैं, साइकिल से सामान बेचना अच्छा नहीं लगा.राजकुमारी देवी के संघर्ष की कहानी सत्ता के गलियारों तक पहुंची.बिहार सरकार ने वर्ष 2007 में किसानश्री सम्मान दिया.बस फिर क्या था राजकुमारी बन गईं किसान चाची.इसके बाद गांव की पगडंडियों से ऊपर महानगर का रुख किया. दिल्ली, गुजरात समेत कई जगहों पर किसान मेले में अपना उत्पादों का स्टॉल लगाया. केंद्र सरकार ने भी उनके संकल्प को पद्मश्री सम्मान देकर नवाजा.भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके यहां गये। उनके स्वागत की तैयारी की गयी. फूल माला से स्वागत करने के बाद उन्हें आचार उपहार दी. अपने प्रोडक्ट से ही उन्हें सम्मानित की.


सरैया प्रखंड के जगत सिंह उच्च विद्यालय मैदान में शनिवार को आयोजित किसान संवाद में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीति की संस्कृति बदल दी है. पहले राजनेता लोगों को गुमराह कर वोट लेते थे. मकसद पूरा होने पर लोगों को बरगला कर उनमें फूट डालते थे और फिर राज करते थे. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इससे अलग हटकर गरीबों, वंचितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की चिंता शुरू की. जितनी भी योजनाएं शुरू की गईं, उनमें गरीबों पर फोकस है.चाहे वह जन- धन योजना हो, मुद्रा योजना हो, उज्जवला योजना हो या उजाला योजना हो. हर योजना का उद्देश्य गरीबों-वंचितों का विकास है.आजादी के इतने वर्षों के बाद भी 18 हजार गांव बिजली से वंचित थे. प्रधानमंत्री उजाला योजना के तहत गांवों को बिजली दी. जिन ढाई करोड़ बस्तियों तक बिजली नहीं पहुंची थी, वहां बिजली पहुंचाई गई.

जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया नहीं, भारत के विकास के पक्षधर हैं. इसमें 130 करोड़ भारतीयों का विकास होगा.आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 क्लॉक रुपए का पैकेज घोषित हुआ है. एमएसएमई के माध्यम से तीन लाख करोड़ रुपए के कर्ज बगैर गारंटी के दिए जाएंगे.इसमें से एक लाख 10 हजार करोड़ जारी हो चुके हैं. देश में 50 लाख लोग रेडी लगाते हैं.प्रधानमंत्री ने उनके विकास की पहल की है.राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज बदलता भारत खड़ा हो रहा है, लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के खाते में 3 महीने तक पांच-पांच सौ रुपए डाले गए.देश के आठ करोड़ 70 लाख किसानों के खाते में दो-दो लाख रुपये पहुंचा दिए गए.

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