जनादेश

उपेक्षा से हुई मौतों का विरोध गैर सरकारी ट्रस्ट का सरकारी प्रचार क्यों? मद्रास में गढ़े गए थे देशभक्त रामनाथ गोयनका देश के लिए क्रिश्चियन फोरम ने की प्रार्थना जहां पीढ़ियों से लॉकडाउन में रह रहे हैं हजारों लोग अमेरिका और चीन के बीच में फंस तो नहीं रहे हम ? बेनक़ाब होता कोरोना का झूठ ! क्या सरकारों के खैरख्वाह बन गए हैं अख़बार ? तुषार मेहता की 'समानांतर' सरकार .... चौधरी से मिले तेजस्वी यादव अजीत जोगी कुशल प्रशासक थे या सफल राजनेता ! पटना में शनीचर को सैलून खुलेगा तो आएगा कौन ? चौधरी चरण सिंह को याद किया खांटी किसान नेता थे चौधरी चरण सिंह एक विद्रोही का ऐसे असमय जाना ! बांग्लादेश से घिरा हुआ है मेघालय पर गरीब को अनाज कब मिलेगा ओली सरकार पीछे हटी क्योंकि बहुमत नहीं रहा ! मंत्रिमंडल विस्तार में शिवराज की मुश्किल बिहार में कोरोना का आंकड़ा तीन हजार पार

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां!

शंभूनाथ शुक्ल

आजकल टीवी पर सुबह-शाम रामानंद सागर की रामायण दिखाई जा रही है. परसों से शुरू हुई और आज राम-विवाह भी हो गया. हो सकता है, कल से राम का रौद्र रूप दिखे, जो अनंत काल तक चलता रहेगा. लेकिन रामायण में सिर्फ लंका काण्ड ही नहीं है. अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किन्धा काण्ड, सुन्दर काण्ड और उत्तर काण्ड भी हैं. लेकिन हम पाते हैं, कि सदैव राम के हिंसक रूप को ही खूब दिखाया जाता है. मगर राम का बाल रूप बहुत आकर्षक है. इसका अद्भुत वर्णन तुलसीदास ने किया है. लेकिन न तो उनके भक्त और न विरोधी तुलसी की इस मेधा के बारे में कभी लिखते हैं. उनको या तो स्त्री और दलित विरोधी बताया जाता है अथवा हिंदू धर्म के त्राता. पर यह एक कवि की अवमानना है. पूरा का पूरा भक्ति काल उन कविताओं से ओत-प्रोत है, जिनमें विह्वलता है, और कवियों की भाव-प्रवणता भी. अगर इन कवियों की ऐसी कविताओं को दिखाया जाए, तो हम समाज को अधिक बाँध पाएंगे.

धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाये राम का रौद्र रूप हमें भयभीत कराता है, लेकिन उनका बाल रूप हमें रिझाता है. हमारे समाज की विडम्बना यह है, कि वह उस रूप पर मोहित हो रहा है, जो विभाजन कारी है, उस रूप पर नहीं, जो जोड़ता है. देखिए, राम का बाल रूप और यह वर्णन भी तुलसीदास का ही है-

ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां.

किलकि-किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय.

धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां॥

अंचल रज अंग झारि विविध भांति सो दुलारि.

तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियां॥

विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर-धुर.

सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियां॥

तुलसीदास अति आनंद देख के मुखारविंद.

रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियां॥

अर्थात राम चन्द्र जी अब घुटुअन चलने से ऊपर की अवस्था में आ गए हैं. लेकिन अभी वे ठीक से खड़े नहीं हो पाते. बस प्रयास करते हैं. खड़े होते तो हैं, पर लटपटा कर गिर पड़ते हैं. जब वे खड़े होकर कदम रखते हैं, तो उनके पैरों की पैजनियाँ बजने लगती हैं. वे गिरते हैं, लेकिन किलकारी भरकर फिर उठ कर चलते हैं. फिर गिरते हैं. फ़ौरन उनकी माताएं उन्हें गोद में उठा लेती हैं. वे अपने आँचल से उनके बदन में लगी धूल को साफ़ करती हैं. और दुलारने लगती हैं. कुछ थोडा बहुत राम और उनके भाई बोलने का प्रयास करते तो हैं, पर साफ़ नहीं बोल पाते, किन्तु उनकी माताएं उनके भाव समझ जाती हैं. कितने प्यारे हैं, ये राज कुमार! इनकी सुन्दर नासिका में पहनाया गया आभूषण लटकनिया बहुत अच्छा लग रहा है. तुलसी कहते हैं, कि रघुबर की छवि का वर्णन उनको साक्षात देखने जैसा ही सुख देता है.

Share On Facebook

Comments

???? ?? ?? ?? ???? ?? ???? ???? ??????? ??? ??? ???? ?? ?????? ????? ??? ??? ?????? ? ??????? ?

Replied by nakutom@gmail.com at 2020-03-30 04:25:32

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :