जनादेश

दक्षिणपंथी उग्रवाद के उभार पर जताई चिंता कारोबारियों को मार दिया अब कश्मीर में सड़ रहे हैं सेब ! पूरे देश का बेटा है अभिजीत -निर्मला बनर्जी हजरतगंज का यूनिवर्सल ! राजे रजवाड़ों से मुक्त होती यूपी कांग्रेस अल्लामा इकबाल का नाम सुना है साहब ! श्री हरिगोबिंद साहिब का संदेश मोदी सरकार के ‘महत्वाकांक्षी जिलों’ का सच समुद्र तट पर कचरा ! समुद्र तट पर शिल्प का नगर दर्शक बदल रहा है-मनोज बाजपेयी जेपी लोहिया पर कीचड़ उछालने वाले ये हैं कौन ? राष्ट्रवाद की ऐसी रतौंधी में खबर कैसे लिखें ! राजस्थान में गहलोत और पायलट फिर आमने सामने पहाड़ का वह डाकबंगला गठिया से घबराने की जरूरत नहीं-डा कुशवाहा राजकुमार से सन्यासी तक का सफर क्या थी कांशीराम की राजनीति ! अब भाजपा के निशाने पर नीतीश कुमार हैं बीएसएनएल की बोली लगेगी ,जिओ की झोली भरेगी!

राहुल गांधी के नाम एक ख़त

चंचल 

राहुल जी ,इस्तीफा दे दीजिए .कार्य समिति से भी .गर कार्यसमिति यह फैसला करती है कि वह आपको आमंत्रित सदस्य के रूप में आपसे कोई सलाह लेना चाहें तो उसकी स्वीकृति दे दें .सियासत के केंद्र में राहिल गांधी स्थापित हो चुके हैं उन्हें विस्थापित करना आसान नही है .वोहदे पर रहें या न रहें .बाज दफे शख्सियत ओहदे को फलांग जाती है .शख्सियत बड़ी और ओहदा बौना हो जाता है .एक उदारण दे रहा हूं , तुलना नही कर रहा हूं .महात्मा गांधी कांग्रेस में आधिकारिक रूप से कुल 17 साल ही रहे .16 में भारत आये , 17 के चंपारण ने उन्हें देश का नही दुनिया का चैंपियन बना दिया .17 से लेकर 34 तक बापू कांग्रेस के सदस्य रहे , अध्यक्ष बने वगैरह वगैरह .34 में कांग्रेस से अलग हट गए लेकिन आमंत्रित सदस्य के रूप में कांग्रेस को इतनी सहूलियत मिल गयी कि जब कांग्रेस ' चाहे ' बापू से सलाह ले सकती है .लेकिन सियासत का खेल देखिए कांग्रेस से हटने के बाद भी केंद्र में बापू ही रहे .

' राहुल जी ! आप वाकिफ होंगे 34 के बाद आख़िरी दिन तक बापू अनेक कार्यक्रम चलाए .वोट ( जनतंत्र ) जेल ( संघर्ष ) और फावड़ा ( रचना ) . कांग्रेस का यह अपना हथियार है उसे आपको चमकाना है .मुद्दे आप दे चुके हैं उन्ही मुद्दों को ,उन्ही सवालों को हल करना शुरू कर दीजिए .पहला मुद्दा है बेरोजगारी .

बेरोजगारी के सवाल पर जो भी गंभीर होंगे उन्हें गांधी के पास जाना ही है .तकनीकी तरक्की , और बहुधंधी मशीने हाथ काटती रहेंगी कोई रोक नही सकता .अब उसे रोका भी नही जा सकता लेकिन उसपर अंकुश तो लगाया ही जा सकता है , उसकी नकलेल पकड़ कर उसे सही दिशा में खड़ा किया जा सकता है .यहां आप सरकार नही है कि कानून से इसे सही दिशा में डाल दें , इसके लिए आपको सड़क पर उतरना पड़ेगा .बहिष्कार .लोहा और पोहा एक साथ नही चलेगा . 

बड़े ओद्योगिक घराने जो लोहा बना रहे हैं कपड़ा उद्योग में लगे है तेल सीमेंट वगैरह पर कब्जा किये हैं उनके कब्जे से छोटे मझोले उद्योग मुक्त हों .आप तेल के बड़े कारोबारी हैं , चिप्स भी आप ही बनाएंगे ? ट्रक और बड़ी गाड़िया बना रहे हैं , म्हकौवा साबुन भी आप ही बनाएंगे? यह नही होगा .वहिष्कार .संघर्ष .जेल .पर विकल्प भी .आपने गली गली नमक बनाया है .बेचा है .लाठी खाये हो , निकालिये नौजवान को गांव गांव छोटा उद्योग चले .साबुन बने .तेल बने .उत्सव की तरह झूम के निकले नौजवान .मझोला उद्योग , लघु उद्योग , बेरोजगारी ही नही खत्म करेगा नौजवान को स्वाभिमान देगा जब वह मुट्ठी भींच कर हवा में हाथ लहराएगा कि सुन सरकार ! अब हम गुलामी के खिलाफ जंग में हैं हमी उत्पादक हैं हमी उपभोक्ता है .हमारे उत्पाद को पैसे पर बिके अमिताभ , रानी मुखर्जी अल्लु दल्लू जगधर नही बेचेंगे , इसे हम बेचेंगे .अगला कदम है .गांव का पैसा गांव में .

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :