जनादेश

ढोरपाटन का वह शिकारगाह ! इस मौसम में भिंडी ,अरबी और कटहल से बचें ! किसान संगठनों ने किया ग्रामीण भारत बंद का एलान जमानत नियम है, जेल अपवाद फिर सौ दिन ? हनीट्रैप का खुलासा करने वाला अखबार निशाने पर कौन हैं ये राहुल बजाज ,जानते हैं ? पानी किसी एक देश का नहीं होता अदरक डालिए साग में अगर कफ से बचना है तो जंगल ,पहाड़ और शिकार ! चलो सोनपुर का मेला तो देखें ! फिर दिखी हिंदी मीडिया की दरिद्रता ! मोदी को ठेंगा दिखाती प्रज्ञा ठाकुर ! गुर्जर-मीणा विवाद में फंसा पांचना बांध तो जेडीयू ने भी दिखाई आंख ! महाराष्ट्र छोड़िए अब बंगाल और बिहार देखिए ! सांभर झील बनी मौत की झील जो आपसे कहीं सुसंस्कृत है! भाजपा और तृणमूल दोनों का रास्ता आसान नहीं कश्मीरी नेताओं का यह कैसा उत्पीडन ! शुक्रिया ,पोगापंथ से लड़ने वाले नौजवानों !

सूखती सरयू और हाशिए पर रामलला !

  1. सत्यप्रकाश पांडे 
  2. उत्तर प्रदेश की एक नगरी, जो बहुसंख्यक भारतीय हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां लोग मोक्ष की कामना लिए पहुंचते हैं जिसकी तरफ लोग हाथ उठाकर कसमें खाते हैं, जहां भगवान को मनुष्य मानकर उनकी सेवा की जाती है, जहां पूरे नगर में रामकथाएं और रामधुन गूंजती हैं, उस नगर को दुनिया 'अयोध्या' के नाम से जानती है. स्थानीय लोग कहते हैं ‘अयोध्या उपेक्षा और राजनीति का शिकार हो गई. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद ने अयोध्या को हमेशा देश और दुनिया में चर्चा का केंद्र बनाये रखा. अदालती फैसले के इंतज़ार में थक चुके स्थानीय लोगों के साथ-साथ मैं भी सोचता हूं  अगर ये विवाद ना होता तो क्या अयोध्या उतनी ही चर्चित होती ? शायद नहीं,  इसका जवाब स्थानीय लोग देते हैं. वे कहते हैं आस्था के शोर में लोगों की जरूरतें, सुविधाएं सब सरकारी फाइलों में दफन हैं. 
  3. अयोध्या राज घराने से ताल्लुक रखने वाले शैलेंद्र जी मिश्र ने हमें बताया, हम हिन्दू हैं, गर्व होता है. जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के पक्षधर शैलेन्द्र ने बताया   भगवान राम की नगरी अयोध्या उपेक्षा और राजनीति का शिकार है. देश की राजनैतिक पार्टियों में किसी ने 'राम' को जरूरत के हिसाब और अपने नफे-नुक़सान के लिए इस्तेमाल किया तो कोई राम से दुरी बनाकर मतलब साधता दिखा. इस आम चुनाव में भी कुछ ऐसा ही है, अफ़सोस होता है तमाम शोर-शराबों के बावजूद इस बार 'राम' फिर से हाशिये पर है . 
  4. अयोध्या के गिरिजेश गोस्वामी कहते हैं 'अयोध्या जिसे राजनीतिक हलकों में बीजेपी की 'प्राणवायु' समझा जाता है वहां नरेंद्र मोदी कभी नहीं आये. शिकायत भरे लहजे में गोस्वामी जी बोले 'नरेंद्र मोदी बनारस से लेकर मगहर तक चले गए.  दुनिया भर में घूम-घूम कर मंदिर, मस्जिद और मज़ार पर सजदा कर आये लेकिन अयोध्या से पता नहीं क्या बेरुख़ी है उन्हें ? ' दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ प्रधानमंत्री रहते कभी अयोध्या नहीं आए ऐसा भी नहीं है. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी अयोध्या यात्रा से परहेज रखा. यही नहीं, लोकसभा चुनाव के दौरान और ढाई बरस पहले हुए विधान सभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई दर्जनों जनसभाओं में उन्होंने कहीं भी अयोध्या या राम मंदिर का कोई ज़िक्र नहीं किया. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान तो एक जनसभा में उन्होंने ये कहकर एक तरह से राम मंदिर को पार्टी की प्राथमिकताओं से ही लगभग ख़ारिज कर दिया कि 'पहले शौचालय, फिर देवालय.' हालांकि पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र में 'राम' हैं मगर इस बार 'राष्ट्र' सबसे ऊपर है.  
  5. अयोध्या के ही दीपक मिश्र कहते हैं, ‘अयोध्या में राम कथा की सालों पुरानी एक परंपरा है, यहां नाट्य कला आज भी ज़िंदा है. यहां की पारम्परिक लोक कलाएं हैं, जिसमें किसी भी तरह की सांप्रदायिकता की कोई चेष्टा नज़र नहीं आती है.  उसे अयोध्या से अलग नहीं किया जा सकता. अयोध्या की जो धार्मिकता है वह सिर्फ हिंदू नहीं है बल्कि उसमें मुसलमान भी हैं. उसमें तमाम अन्य जातियों के लोग भी हैं.  अयोध्या बहुत उदार सांस्कृतिक, धार्मिक और पारम्परिक धरातल है, जो लोग इसे  राजनीतिक रंग देते हैं उन्हें ये याद रखना होगा की रामलीला के विकास में मुग़लों की भी बड़ी भूमिका रही है. अयोध्या की जीवनदायनी सरयू नदी इन दिनों सुखी हुई हैं, घाट गंदगी से पटे हैं. सरकार स्वच्छता का नारा लिखकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त होने का दम्भ भर रही है.  
  6. यहां हनुमान गढ़ी और उसके आसपास की सड़कों पर दोनों तरफ़ दुकानें हैं. चूड़ियों की दुकानें, सिंदूर-चंदन, मूर्तियों के अलावा धार्मिक साहित्य और पूजन सामग्री की दुकानें सजी हैं. इसी हनुमानगढ़ी से पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रोड शो किया और कांग्रेस के लिए सियासी जमीन तलाश की. अयोध्या भले ही ख्याति में हिंदू तीर्थ है  लेकिन मंदिरों में हर जाति के महंत हैं वहीं सड़कों पर हर जाति धर्म के दुकानदार. अयोध्या के हनुमानगढ़ी में  यूसुफ मियां की चूड़ियों की दुकान है. वे कहते हैं ‘अयोध्या हमारी जन्मभूमि है, हम यहीं पैदा हुए - यहीं पले-बढ़े बड़े. अयोध्या से हमारी रोज़ी-रोटी चलती है. हमें तो आज तक कोई परेशानी नहीं है. वे मानते हैं हिन्दू-मुसलमान का झगड़ा पैदा करने वाले लोग अयोध्या के नहीं हैं. 
  7. पिछले दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी मिज़ाज की नब्ज टटोलते हुए जब अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में घूम रहा था तो लगा बिना अयोध्या गए यात्रा अधूरी रह जायेगी.  29  मार्च को मैंने अयोध्या का रुख किया, मैं लखनऊ की तरफ़ से नवाबगंज होते हुए अयोध्या की ओर बढ़ रहा था. कटरा बाज़ार पार करते ही शफ़्फ़ाक रेत की चादरों के बीच बहती सरयू नदी ने हमारा स्वागत किया. एक पतली मगर स्वच्छ धार जो दिल्ली की काली पड़ चुकी यमुना से हज़ार गुना साफ़.  एक तरफ़ आस्थावानों के नहाने के लिए घाट और दूसरी तरफ़ दूर तक फ़ैले तट पर बना श्मशान घाट . 'राम' की नगरी को मैंने करीब से देखा और समझने की कोशिश की . गलियों से गुजरती गलियां, खंडहर हो चुकीं कइयों इमारतों में जिंदगी बसर करते लोगों को रामलला पर भरोसा है. मगर रामराज्य कब आएगा अनुराग तिवारी नहीं जानते लेकिन रिक्शा खींचते रसूल मियाँ कहते हैं 'अयोध्या' में भाईचारा है.

Share On Facebook

Comments

Subscribe

Receive updates and latest news direct from our team. Simply enter your email below :